पटनाः तेज प्रताप यादव ने 'लालू की रसोई' में लिट्टी-चोखा बनाकर गरीबों के बीच बांटा, देखें वीडियो
पटना। लॉकडाउन में गरीबों और मजदूरों की मदद करने के लिए आरेजडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सराहनीय कदम उठाया। उन्होंने मदद करने के तहत 'लालू की रसोई' में लिट्टी-चोखा बनाकर गरीब परिवारों में बंटवाया। बीते 6 मई को तेज प्रताप यादव ने ऐलान किया था कि लॉकडाउन के बाद वह अपने पिता के नाम पर लालू की रसोई रेस्टोरेंट की मेगा लॉन्चिंग करेंगे।

लालू की रसोई में बनवाया खाना
इसके तहत गरीबों को एक शाम का खाना मुफ्त में खिलाया जाएगा। हालांकि बाकी लोगों को खाने का पेमेंट करना होगा। तेजप्रताप यादव का कहना है कि 'लालू की रसोई' में पिछले महीनेभर से जरूरतमंदों के लिए खाना बनाया जा रहा है। वो खुद प्रतिदिन गरीबों में खाना बांटते हैं। वहीं भाजपा के प्रवक्ता निखिल आन्नद ने 'लालू की रसोई' की मेगा लॉन्चिंग की घोषणा पर चुटकी लेते हुए कहा था कि 'लालू की रसोई' में तेजप्रताप अपने छोटे भाई तेजस्वी को भी पार्टनर बना लें क्योंकि आने वाले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी हार जाएंगे और खाली बैठेंगे।

सीएम नीतीश कुमार को लेकर किया विवादित टिप्पणी
इसके अलावा तेजप्रताप यादव ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर विवादित बयान दिया है। तेजप्रताप ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'क्वारंटाइन चाचा' कहकर संबोधित किया है और कहा है कि अब तेजस्वी भी पटना आ गए हैं। हम दोनों भाई मिलकर सीएम नीतीश कुमार पर धावा बोलेंगे और उनके घर जाकर उन्हें नींद से जगाएंगे। उन्हें घर से निकालकर क्वारेंटाइन सेंटर भेजना है।
लालू की रसोई में आज "लिट्टी-चोखा" बनल रहे।#tejraftaartejasvisarkaar के तमाम साथियन के सहयोग से 1000 गरीब परिवार के घरे-घरे पहूँचावल गईल। pic.twitter.com/ERsevteU0e
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) May 12, 2020
नीतीश कुमार को बताया 'क्वारंटाइन चाचा'
तेजप्रताप ने कहा कि अपने हमारे क्वारेंटाइन चाचा अभी अपने आवास में गहरी नींद में हैं, और ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी आ जाएं तो उन्हें उठा नहीं सकते। बता दें कि तेजप्रताप आए दिन खबरों में बने रहते हैं। कभी अपने काम को लेकर तो कभी अपनी वेशभूषा को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। लालू यादव ने दोनों बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी को एक साथ राजनीति में लॉन्च किया था। तेजस्वी यादव लालू के उत्तराधिकारी बन गए, जबकि तेजप्रताप अभी तक अपनी जमीन ही मजबूत नहीं कर पाए हैं।












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