बिहार चुनाव 2015: दोस्त बने दुश्मन और दुश्मन बने दोस्त
पटना। चुनाव आयोग द्वारा रविवार को सितंबर-अक्टूबर में बिहार विधानसभा चुनाव कराने के संकेत दिए जाने के साथ ही बिहार के सभी राजनीतिक दल 'चुनावी मोड' में नजर आने लगे हैं। सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने की बाात कर रहे हैं। वैसे बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में तय है कि पिछले चुनाव के दोस्त दुश्मन नजर आएंगे और पिछले चुनाव के दुश्मन हाथ थामे रहेंगे।

लालू नीतीश बने दोस्त
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा और जनता दल (युनाइटेड) जहां साथ चुनाव लड़े थे, इस चुनाव में तय है कि ये दोनों दल आमने-सामने होंगे, वहीं 20 वर्ष से अलग-अलग राजनीति कर रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद गले मिल चुके हैं।
अभी भी आपसी मतभेद
दोनों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी आपसी मतभेद दिख रहे हैं। दलों में विलय में तकनीकी अड़चन आने के बाद सीटों का तालमेल कर चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हैं। वैसे, अब तक सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।
सुशील-पासवान बने दोस्त
पिछले चुनाव में राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) राजद के साथ चुनाव मैदान में उतरी थी परंतु लोकसभा चुनाव में लोजपा ने राजग का दामन थाम लिया था। यानी वे सुशील मोदी के दोस्त बन गये। तय माना जा रह है कि लोजपा अगले चुनाव में भाजपा के ही साथ चुनाव मैदान उतरेगी।
कांग्रेस-जदयू-राजद बन सकते हैं दोस्त
कांग्रेस के नेता अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दे रहे हैं, परंतु कांग्रेस अगर राजद और जद (यू) के साथ चुनाव मैदान में नजर आए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।
मांझी-नीतीश बने दुश्मन
आगामी विधानसभा चुनाव में नीतीश के कभी करीबी रहे जीतन राम मांझी इस बार नीतीश की जदयू के विरुद्ध चुनाव लड़ेंगे। मांझी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) बनाकर सभी 243 सीटों पर लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। मांझी ने ऐसे किसी भी दल या गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसमें नीतीश कुमार होंगे।
पप्पू-लालू बने दुश्मन
राजद से निष्कासित सांसद पप्पू यादव भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। वहीं पप्पू यादव ने 'जनक्रांति अधिकार मोर्चा' बनाकर खुद को राजद का असली वारिस बताकर राजद के लिए परेशानी उत्पन्न कर दी है।
पप्पू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश और लालू के गठबंधन से किसी प्रकार का चुनावी तालमेल नहीं होगा। ऐसे में यह तय है कि विधानसभा चुनाव में मांझी, नीतीश के जद (यू) के सामने होंगे, वहीं पप्पू राजद को हराने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे।
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