लालू-नीतीश-सोनिया के महागठबंधन में फूट सकते हैं बगावत के स्वर
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार में विधानसभा की कुल सीटें 243 हैं, लेकिन जनता परिवार के गठबंधन के साथ जुड़ने वाली पार्टियों की मांग 300 से ज्यादा सीटों की है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस गठबंधन में राजद और जदयू के अलावा कांग्रेस, एनसीपी और लेफ्ट पार्टियां भी शामिल होंगी। ऐसे में सीटों के बंटवारे का पेंच फंस सकता है।
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कहां फंसेगा पेंच, पढ़ने से पहले कुछ जरूरी बातें-
- 2010 के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी दोनों अकेले चुनाव लड़े थे।
- गठबंधन में शामिल हो रही पांचों पार्टियों ने साढ़े पांच सौ से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था।
- लालू के नेतृत्व वाली राजद की मांग 142 सीटों की है।
- शरद यादव के नेतृत्व वाली जनता दल यू को 120 सीट चाहिए।
- राहुल गांधी के बिहार के चक्कर काटने के पीछे कम से कम 30 सीटे हैं।
- एनसीपी ने भी 25 सीटों की मांग रखी हैं वहीं लेफ्ट को 17 से 20 सीट चाहिए।
- इन सबको जोड़ें तो संख्या तीन सौ से पार चली जाती है।
ऐसे में सीटों के बंटवारे पर झगड़ा पक्का है
पहली बार प्रस्तावित फार्मूले के मुताबिक राजद और जदयू एक-एक सौ सीट बांटें तब जाकर समीकरण सही बैठेगा। एनसीपी ने 2005 का दूसरा चुनाव गठबंधन में लड़ा था और आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इस बार उसके नेता तारिक अनवर सांसद भी हैं। सो, उसे पांच से आठ, कांग्रेस को 25 और लेफ्ट को दस सीट दें, तब समीकरण बिल्कुल सही होगा। लेकिन इन आंकड़ों पर पांचों में से कोई सहमत नहीं दिख रहा है।













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