बिहार चुनाव में हावी रहा गोमांस और आरक्षण
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक प्रभावकारी गोमांस और आरक्षण का मुद्दा रहा। इसी की वजह से पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने खुब सुरखियां बटोरीं। हलाकि अब परिणाम की बारी आ गई है। आठ नवंबर को चुनाव परिणाम सामने आयेंगे। वनइंडिया पर आप लाइव परिणाम देख सकेंगे।
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कल चुनाव परिणाम के साथ ही साफ हो जायेगा कि भाजपा द्वारा खेले गये जातिगत कार्ड का जनता ने क्या जवाब दिया है। फिलहाल जिस तरह के सर्वेक्षण परिणाम सामने आये हैं, वे भाजपा के लिए शुभ संकेत तो नहीं हैं।
आपको बताते चले कि बिहार विधानसभा चुनाव 2015 की सबसे बड़ी खासियत रही कि इसके एजेंडे चुनाव के शंखनाद से पहले ही तय हो गये थे। हालांकि मतदान के पांच चरणों के दौरान दोनों यानी भाजपा गठबंधन व राजद-जदयू-कांग्रेस महागठबंधन की ओर से मुद्दे उछाले गये। इनमें सबसे अधिक प्रभावकारी गोमांस और आरक्षण का मुद्दा रहा।
आरक्षण को लेकर जातिगत गोलबंदी के प्रयास राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा तभी शुरू कर दिया गया था, जब केंद्र सरकार ने आर्थिक जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी और जातिगत जनगणना की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसी मुद्दे ने लालू प्रसाद को पूरी राजनीति को अगड़ा बनाम पिछड़ा करने का सुनहरा अवसर दे दिया।
जो बिहार की राजनीति जानते और समझते हैं, उनके लिए यह तथ्य समझना जटिल नहीं है कि धार्मिक उन्माद का मुकाबला केवल जातिगत एकता ही कर सकती है। राजद प्रमुख ने यह फार्मूला वर्ष 1995 में भी अपनाया था। तब उन्हें नीतीश कुमार के बगैर भी बंपर जीत मिली थी।
लालू प्रसाद के एजेंडे को सबसे अधिक हवा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यह कहकर दे दी कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। भागवत के बयान ने जहां एक ओर आरक्षण समर्थकों को एकजुट होने का संदेश दिया तो आरक्षण विरोधियों में एकजुटता भी बनने लगी। लेकिन उनकी एकजुटता तब खंडित होने लगी जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों ने आरक्षण को बरकरार रखने की बात कही और भाजपा को आरक्षण समर्थक करार दिया।
दलितों-पिछड़ों के वोटों में सेंधमारी के लिए भाजपा के द्वारा किया गया यह आरक्षण विरोधियों को हतोत्साहित करने वाला साबित हुआ। इसका परिणाम यह भी हुआ कि जिन क्षेत्रों में आरक्षण समर्थकों का प्रभाव भाजपा के लिए हितकारी साबित हो सकता था, वैसा नहीं हुआ।













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