कश्‍मीर मसले पर UN में चर्चा चाहता है पाकिस्‍तान, कोई सुनने को ही नहीं तैयार

इस्लामाबाद। जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही पाकिस्‍तान कश्‍मीर को लेकर हताश और परेशान है। पिछले दिनों जेनेवा में जारी यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) में पाक की तरफ से कम से कम चार बार कश्‍मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश की गई। पाक चाहता था कि यूएनएचआरसी में कश्‍मीर मसले पर बहस हो और एक प्रस्‍ताव भी पास किया जाए। मंगलवार को यूएनएचआरसी सत्र के दौरान पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्‍मीर मसले पर बयान दिया था।

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कश्‍मीर मसले पर नहीं ला पाया कोई प्रस्‍ताव

जेनेवा और न्‍यूयॉर्क में मौजूद राजनयिकों की मानें तो चीन के अलावा संगठन के 47 सदस्‍यों में से किसी ने भी कश्‍मीर मसले पर बहस की इच्‍छा नहीं जताई। वहीं यूरोपियन देशों ने इस मसले पर चुप्‍पी साधे रखी। पाकिस्‍तान जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) काको-ऑर्डिनेटर है, उसकी तरफ से एक साझा बयान जारी किया गया था। इस बयान में दावा किया गया है कि सभी 58 सदस्य देश, कश्‍मीर मसले पर पाकिस्‍तान का समर्थन कर रहे हैं और भारत के खिलाफ हैं। जबकि ओआईसी के किसी देश की ओर से न तो अभी तक के बयान की आलोचना की गई है और न ही डॉक्‍यूमेंट को चुनौती दी गई है। जबकि इस संगठन के एक प्रभावी वर्ग की ओर से निजी तौर पर अपने भारतीय समकक्षों को बताया गया है कि उसका इस बयान से कोई लेना-देना नहीं है।

पाकिस्‍तान ने चीन और गैर-अरब देशों से अलग अभी तक उन 58 देशों का नाम नहीं बताया है जो उसके कश्‍मीर मसले पर दिए गए बयान का समर्थन कर रहे हैं। एक यूएन डिप्‍लोमैट की मानें तो जेनेवा में इस मुद्दे को चार से पांच बार उठाने के बाद भी पाक को यूएनएचआरसी में कश्‍मीर मसले पर चर्चा करने के लिए कोई समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है।

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