भाई-बहन ने BPSC में गाड़े झंडे! एक ही घर से निकले दो बड़े अफसर, राहुलेंद्र बने SDM, सुमिता को भी मिला बड़ा पद

BPSC Success Story: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा के परिणाम ने इस बार सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया क्षेत्र को खास पहचान दिलाई है। नगर परिषद क्षेत्र के एक ही परिवार से दो भाई-बहनों ने एक साथ बड़ी सफलता हासिल कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जहां कई परिवारों के लिए एक सरकारी अधिकारी बनना गर्व की बात होती है, वहीं बैरगनिया के इस परिवार में दो बच्चों ने एक साथ प्रशासनिक सेवा में जगह बनाकर नया उदाहरण पेश किया है।

जैसे ही उनकी सफलता की खबर सामने आई, पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया। रिश्तेदारों से लेकर स्थानीय लोगों तक हर कोई इस उपलब्धि की चर्चा करता नजर आया। दोनों भाई-बहनों की मेहनत, अनुशासन और वर्षों की तैयारी का परिणाम अब सबके सामने है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा में लगातार किए गए प्रयास बड़े सपनों को भी हकीकत में बदल सकते हैं। यही वजह है कि आज पूरे क्षेत्र में उनके नाम की चर्चा हो रही है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

BPSC Success Story

भाई बने SDM

बैरगनिया नगर परिषद की सभापति सिंधु गुप्ता और सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजमोहन कुमार के बेटे राहुलेंद्र कुमार ने BPSC परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन SDM पद के लिए हुआ है। राहुलेंद्र की सफलता को लेकर परिवार में लंबे समय से उम्मीदें थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर पूरा कर दिखाया। उनके चयन की खबर सामने आते ही परिजनों और शुभचिंतकों ने खुशी जाहिर की। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि राहुलेंद्र ने युवाओं के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

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बहन ने भी बढ़ाया परिवार का मान

राहुलेंद्र कुमार की बहन सुमिता गुप्ता ने भी इसी परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का गौरव बढ़ाया है। उनका चयन एससी-एसटी वेलफेयर पदाधिकारी के पद पर हुआ है। एक ही परिवार से भाई और बहन दोनों का प्रशासनिक सेवाओं में चयन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सुमिता की इस सफलता ने परिवार की खुशियों को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों भाई-बहनों ने अपनी लगन और मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

घर पहुंचते ही हुआ भव्य स्वागत

दोनों बच्चों की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में उत्सव जैसा माहौल बन गया। घर पहुंचने पर माता-पिता ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। चंदन-तिलक लगाने के बाद आरती उतारी गई और मिठाई खिलाकर खुशी साझा की गई। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। माता-पिता के चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने दोनों बच्चों को आगे भी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करने की शुभकामनाएं दीं।

युवाओं के लिए मिसाल बनी सफलता

स्थानीय लोगों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र से निकलकर दोनों भाई-बहनों ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह साधारण नहीं है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि संसाधन चाहे जैसे भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो बड़ी परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है। यही कारण है कि छात्र-छात्राएं अब राहुलेंद्र और सुमिता की कहानी को प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में कई युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने का हौसला दे सकती है।

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