पाकिस्तान की मीडिया बोली-हिंदुत्व के एजेंडे वाली बीजेपी की सत्ता पर पकड़ हो गई कमजोर
इस्लामबाद। भारत के पांच राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनावों पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की भी नजरें थीं। नतीजे आए और इनमें केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान के मीडिया ने भी नतीजों पर पूरे दिन नजर बनाए रखी और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। आपको बता दें कि पाकिस्तानी मीडिया की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पाक प्रधानमंत्री इमरान खान बीजेपी और मोदी सरकार को पाकिस्तान और मुसलमान विरोधी करार दे चुके हैं। यह भी पढ़ेंकिन राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस का वोट शेयर कितना बढ़ा और गिरा

पीएम मोदी के लिए बड़ा झटका
पाकिस्तान के अग्रणी अखबार द डॉन ने लिखा कि भारत में हिंदी बेल्ट के अहम राज्यों में मंगलवार को आए चुनावी नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले झटका हैं। सत्ताधारी बीजेपी जिसकी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर पकड़ थी, अब यहां की सत्ता से बाहर हो चुकी है। डॉन ने लिखा है कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश से 65 में से 62 सीटें आई थीं। डॉन की मानें तो नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदुत्व पर आधारित पर राजनीति का मजाक उड़ाने वाले हैं। इस आर्टिकल में राजस्थान के पहले गाय मंत्री ओटाराम देवासी का भी जिक्र है जिन्हें सिरोही सीट पर 10,000 वोटों से हार मिली है।

मोदी तो स्टार प्रचारक थे अब क्या
डॉन की मानें तो इन चुनावों में भी पीएम मोदी को पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर देखा गया था। अब हार के बाद उनकी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की जवाबदेही बनती है। उन्हें बताना होगा कि आखिर चुनावों में कहां गड़बड़ी हुई और पार्टी को हार मिली। डॉन की मानें तो जिन तीन राज्यों में पार्टी को हार मिली है, उन्हें गुजरात मॉडल का उदाहरण समझा जाता था। ये राज्य बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति के लिए काफी अहम है। अखबार ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया है कि मोदी के कार्यकाल में भारत में गौरक्षकों की ओर मुसलमानों के साथ भीड़ ने हिंसा की। डॉन के मुताबिक इन राज्यों में न तो गुजरात मॉडल काम आया और न उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोरदार कैंपेनिंग।

कांग्रेस की भी राह आसान नहीं
अखबार ने हालांकि इस बात का भी जिक्र किया है कि साल 2003 में जब तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी बीजेपी को विशाल जीत मिली थी। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। उस जीत के बाद लोग लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी की जीत तय मानने लगे थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बाजी पलट गई। पार्टी दोबार सत्ता में नहीं आ सकी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन को सत्ता मिल गई थी। ऐसे में जो लोग यह सोच रहे हैं कि कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में आसानी से सत्ता मिल सकती है तो उन्हें जान लेना होगा राह अभी आसान नही है।
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