Video: पीएम इमरान खान बोले-फेल हुआ पाकिस्तान का कश्मीर कैंपेन, ट्रंप से लेकर मैंक्रो तक किसी ने नहीं सुनी मेरी बात
न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर पर कई उम्मीदों के साथ अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन अब उन्होंने यह बात मान ली है कि उनका 'मिशन कश्मीर' पूरी तरह से फेल हो चुका है। इमरान ने मंगलवार को अपनी हार स्वीकार की और कहा कि कश्मीर पर उन्होंने भारत पर दबाव बनाने का जो कैंपेन शुरू किया था वह पूरी तरह से फेल हो गया है। वह इस बात को लेकर खासे निराश है कि इस कैंपेन को बहुत कम प्रतिक्रिया मिली। इमरान ने इसके पीछे भारत की एक अरब की आबादी वाले बाजार की अपील को और कश्मीरियों के मुसलमान होने को दोष दिया है।

अमेरिका और यूरोप होता तो कुछ और बात थी
इमरान ने यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सच बताऊं तो मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से थोड़ा निराश हूं।' इमरान ने आरोप लगाया कि अगर 80 लाख यूरोपियन्स, यहूदियों या फिर अमेरिकी लोगों को किसी तरह की घेराबंदी में रखा जाता तो शायद अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिलती। यहां तक कि अगर सिर्फ आठ अमेरिकियों को ही कब्जे में रखा होता तो भी प्रतिक्रिया अलग होती। इमरान के शब्दों में, 'पीएम मोदी पर इस घेराबंदी को खत्म करने के लिए कोई दबाव ही नहीं है।' इमरान ने ये बातें उस समय कहीं जब वह जम्मू कश्मीर से हटाई गई धारा 370 के संदर्भ में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
हर नेता के पास गया लेकिन कुछ नहीं हुआ
उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने से जुड़े सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसलिए भी खामोश है क्योंकि भारत एक अरब लोगों का बाजार है और दुख की बात है मानवता से पहले इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है। इमरान और उनके प्रतिनिधिमंडल ने हर मंच पर कश्मीर का मसला उठाया है। इमरान की मानें तो जो कुछ हो सकता था वह सब किया गया है। उन्होंने इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा यूके के पीएम बोरिस जॉनसन से लेकर जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और फ्रेंच प्रेसीडेंट इमैनुएल मैंक्रो तक के सामने कश्मीर मुद्दा उठाया है।
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टर्की के राष्ट्रपति ने दी तसल्ली
इमरान को थोड़ी बहुत तसल्ली बस टर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्डोगान के शब्दों से मिली है। एर्डोगान ने कहा, 'कश्मीरी लोगों का भविष्य उनके पाकिस्तानी और भारतीय पड़ोसियों के साथ है। अब इस समस्या को बातचीत, न्याय और समानता के आधार पर ही सुलझाया जा सकता है न कि टकराव के जरिए।' एर्डोगान ने तो प्रतिबंधों को खत्म करने की बात की और साथ ही तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की बात भी कह डाली। इमरान खान के मुताबिक वह चाहते हैं कि और नेता भी आगे आए और एर्डोगान की तरह अपील करें।












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