पीएम शाहबाज शरीफ के साथ हो रहा ये कैसा गजब खेल, एक अदालत ने FIR का दिया आदेश, तो दूसरी ने पहुंचाई राहत
जिला अदालत के न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, उनके बेटे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। वहीं, एक दूसरे मामले में अदालत ने पीएम और उनके बेटे हमजा को राहत दी है।
इस्लामाबाद, 04 जूनः पाकिस्तान में जारी राजनैतिक उथल-पुथल के बीच लाहौर में शनिवार को एक जिला अदालत के न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, उनके बेटे और पंजाब के मुख्यमंत्री हमजा शहबाज, आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। वहीं, एक दूसरे मामले में अदालत ने पीएम और उनके बेटे हमजा को राहत दी है। अरबों रुपये के मनी लॉन्डरिंग मामले में 11 जून तक उनकी जमानत अवधि बढ़ा दी गई है।

आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आजादी मार्च के दौरान इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के कार्यकर्ताओं को घायल करने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए कई मंत्रियों पर मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले एक अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश ने भाटी गेट पुलिस स्टेशन के SHO को आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह, सीपीपीओ लाहौर और डीआईजी समेत आठ पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ 400 अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ वकीलों पर हमला करने और उनके वाहनों को नुकसान पहुंचाने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

आजादी मार्च के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज
याचिकाकर्ता वकील अफजल अजीम के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पीटीआई समर्थकों को प्रताड़ित किया। इन अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को पार्टी के आजादी मार्च में शामिल होने से रोकने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह एक गंभीर अपराध था जिसमें कानून लागू करने वालों ने महज विचारधारा के आधार लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के साथ भेदभाव किया और उन्हें प्रताड़ित किया। वकील अजीम ने दलील दी कि आजादी मार्च में हुई हिंसा की लिए शहबाज सरकार को जिम्मेदार हैं। उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों पर इल्जाम लगाया कि इन्होंने, प्रधानमंत्री, प्रांतीय मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की मर्जी पर यह अपराध किया है।

इमरान खान पर हुआ था मामला दर्ज
गौरतलब है कि इमरान खान और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं पर बर्बरता के आरोपों में इस्लामाबाद के कई पुलिस स्टेशनों में 14 मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री को 25 जून तक के लिए जमानत दे दी। आजादी मार्च को शांतिपूर्ण बताते हुए इमरान खान ने कहा था कि वर्तमान सरकार ने आंसू गैस, लाठीचार्ज, फायरिंग, गोलीबारी, रबर की गोलियों और बंदूक से रासायनिक गोले का इस्तेमाल किया और अत्यधिक बल प्रयोग करके लोगों के मौलिक अधिकारों को छिन्न-भिन्न कर दिया।

अदालत में पेश हुए पीएम
वहीं, एक दूसरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बेटे हमजा कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष अदालत में पेश हुए। इस दौरान पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी ने अरबों रुपये के मनी लॉन्डरिंग मामले में शनिवार को अदालत से आगे की जांच के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बेटे एवं पंजाब के मुख्यमंत्री हमजा शहबाज की गिरफ्तारी का अनुरोध किया। हालांकि अदालत ने जांच एजेंसी का अनुरोध ठुकरा दिया और उनकी अग्रिम जमानत 11 जून तक बढ़ा दी है। संघीय जांच एजेंसी ने प्रधानमंत्री और अन्य संदिग्धों के खिलाफ 14 अरब रुपये के धनशोधन मामले में अंतरिम जांच रिपोर्ट भी दायर किया है।

2020 में हुआ था मामला दर्ज
प्रधानमंत्री के वकील अमजद परवेज ने एफआईए की याचिका पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे एजेंसी का झूठा दावा करार दिया। वहीं, पीठासीन न्यायाधीश एजाज अवान ने मामले में प्रधानमंत्री के दूसरे बेटे सुलेमान शहबाज के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट फिर से जारी किया और सुनवाई 11 जून तक के लिए स्थगित कर दी। सुलेमान 2019 से फरार है और ब्रिटेन में रह रहा है। बतादें कि शहबाज और उनके बेटों- हमजा तथा सुलेमान के खिलाफ एफआईए ने नवंबर 2020 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं मनीलॉन्डरिंग अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।












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