मदीना के मस्जिद में पीएम शहबाज शरीफ को कहा चोर, गद्दार, भिखारी, सऊदी ने 6 लोगों को सुनाई ये सजा
रियाद, 05 अगस्तः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ इसी साल अप्रैल महीने में सऊदी अरब पहुंचे थे। इस दौरान कुछ पाकिस्तानी नागरिकों ने पीएम और उनके प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ नारेबाजी की और उनके साथ दुर्व्यहार किया। इसके बाद पुलिस ने वहां करीब 150 लोगों को हिरासत में ले लिया। अब इनमें से 6 लोगों को मदीना की मस्जिद-ए-नबी की पवित्रता उल्लंघन करने के आरोप में दोषी पाया गया है।

6 लोगों को अदालत ने पाया दोषी
जियो न्यूज कि रिपोर्ट के मुताबिक मदीना की एक अदालत ने छह लोगों को इसके लिए दोषी पाया है। इसके लिए तीन नागरिकों अनस, इरशाद और सलीम को 10 साल की सजा जबकि अन्य तीन नागरिक लुकमान, गुलाम और अफजल को आठ साल की सजा सुनाई गई है। जेल की सजा के अतिरिक्त इन लोगों पर बीस-बीस हजार सऊदी रियाल का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा इन सभी लोगों के फोन भी जब्त कर लिए गए हैं।

सऊदी अरब दौरे पर गए थे शाहबाज शरीफ
गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस साल अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 3 दिवसीय सऊदी अरब के दौरे पर गए थे। इस दौरान इमरान खान की पार्टी पीटीआई से जुड़े लोगों ने मदीना में मस्जिद-ए-नबी की पवित्रता का उल्लंघन किया। जैसे ही प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनके प्रतिनिधिमंडल के लोग वहां पहुंचे इन प्रदर्शनकारियों ने चोर, गद्दार और भिखारी जैसे नारे लगाने शुरू कर दिया।

पाकिस्तानी नेता के खिलाफ की अपमानजक टिप्पणी
इसके अलावा इन लोगों ने पाकिस्तानी नेता मरियम औरंगजेब के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं। तीर्थयात्रियों द्वारा किए गए उत्पीड़न का जवाब देते हुए, मरियम औरंगजेब ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह कृत्य एक "चुनिंदा समूह" द्वारा किया गया था, जबकि अधिकांश पाकिस्तानी पवित्र मस्जिद की पवित्रता का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, "मैं इस घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहती क्योंकि मैं इस पवित्र भूमि का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं करना चाहती।"
शहजैन बुगती को सुरक्षागार्ड्स ने बचाया
प्रदर्शनकारियों ने जम्हूरी वतन पार्टी के प्रमुख और नारकोटिक्स कंट्रोल के संघीय मंत्री शहजैन बुगती के साथ अपमानजनक सुलूक किया और उनके बाल खींचे। जिसके बाद सऊदी के सुरक्षागार्ड्स ने उन्हें बचाया। इस घटना का लोगों ने वीडियो भी बनाया था जो कि सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस घटना ने खूब सुर्खियां भी बटोरी थीं, जिसके बाद राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के साथ समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने इस पर अपनी नाराजगी जताई थी।

घटना की लोगों ने की निंदा
इस घटना के लिए अपदस्थ प्रधान मंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को दोषी ठहराते हुए, नवनियुक्त विदेश मंत्री बिलावल की बहन आसिफा भुट्टो-जरदारी ने कहा कि विपक्षी दल "असहिष्णुता और विभाजन" को उकसा रहा था। धार्मिक विद्वान मौलाना तारिक जमील ने भी ट्वीट किया कि पवित्र मस्जिद में विरोध "इस्लाम में स्वीकार्य" नहीं था। वहीं, पीटीआई के महासचिव असद उमर ने कहा कि पवित्र स्थानों की पवित्रता का सम्मान करना सभी के लिए जरूरी है।












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