पाक ने बताया मुसलमानों को नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से क्यों लगता है डर
पाकिस्तान मीडिया का डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मुसलमानों पर बढ़े अत्याचार और बन रहा है डर का माहौल। राष्ट्रपति बनने के बाद मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार में हुआ इजाफा।
इस्लामाबाद। नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ लेने के बाद पाकिस्तान में एक अजीब सा माहौल बन गया है। इसका इशारा पाकिस्तान के अखबार द डॉन में लिखे एक एडीटोरियल से मिलता है। इस एडीटोरियल में कहा गया है कि ट्रंप के आने के बाद से अमेरिकी मुसलमानों में एक अजीब सा डर महसूस किया जा सकता है।

बढ़े मुसलमानों पर अपराध
राष्ट्रपति ट्रंप ने शपथ लेते समय भी साफ-साफ कहा है कि वह धरती से चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करके रहेंगे। डॉन के एडीटोरियल में लिखा है कि इस बात की ओर पहले ही इशारा मिल चुका है कि ट्रंप अपने कार्यकाल में अमेरिकी मुसलमानों के लिए कैसा रुख रखने वाले हैं। ट्रंप के चुनावी अभियान ने अमेरिका में बसे मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अपराधों में काफी इजाफा किया। फेडरल ब्यूरों ऑफ इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) के आंकड़ों मुताबिक वर्ष 2015 में मुसलमानों के खिलाफ हेट क्राइम्स में करीब छह प्रतिशत की दर से इजाफा हुआ और यह सबसे ज्यादा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद मुसलमानों के खिलाफ हेट क्राइम्स में 67 प्रतिशत इजाफा हुआ है। 257 केस दर्ज किए गए जिसमें हिंसा, मस्जिदों पर हमलों के अलावा दूसरे अपराध शामिल थे। वर्ष 2001 में हुए आतंकी हमलों के बाद से यह आंकड़ा सर्वोच्च है। डॉन के मुताबिक चुनावों के साथ-साथ हेट क्राइम्स में और इजाफा होता गया।
कैबिनेट डर की वजह
डॉन के इस एडीटोरियल में सदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर के हवाले से लिखा है कि राष्ट्रपति चुनावों के दौरान करीब 867 हेट क्राइम्स की घटनाएं दर्ज हुईं और वह भी सिर्फ 10 दिनों में। एडीटोरियल के मुताबिक नौ नवंबर को चुनावों के बाद करीब 202 घटनाएं दर्ज की गईं। सदर्न पावर्टी लॉ सेंटर के मुताबिक 867 घटनाओं में से 280 घटनाओं के पीछे शरणार्थियों के लिए दुर्भावना अहम वजह थी, खासतौर पर मुसलमान विरोधी भावना। इन हेट क्राइम्स के लिए ट्रंप की प्रतिक्रिया भी काफी कमजोर है। उनसे 13 नवंबर 2016 को एक कार्यक्रम 60 मिनट्स में इस मुद्दे पर जब पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ 'स्टॉप इट' कहा।
मुसलमानों की स्क्रीनिंग की बात
ट्रंप ने अमेरिका में आने वाले मुसलमानों पर बैन लगाने की बात कही है और साथ ही उन्होंने स्क्रीनिंग की बात भी कही है। एडीटोरियल की मानें तो ट्रंप के अमेरिका में अमेरिकी मुसलमानों को न सिर्फ हिंसा और शोषण का डर लगा हुआ है बल्कि वह उन नीतियों से भी घबराए हुए हैं जो ट्रंप उन्हें बाहर निकालने के लिए तैयार कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने कैबिनेट में जिन लोगों को जगह दी है उनसे भी डर लगने लगा है। इस एडीटोरियल में ट्रंप की ओर से मुसलमानों का डाटाबेस तैयार करने से लेकर उन लोगों को लेकर चिंता जाहिर की गई है जिन्हें ट्रंप ने अपनी कैबिनेट के लिए नॉमिनेट किया है। इन नामों में अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंस, होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव जॉन केली, विदेश सचिव के लिए रेक्स टिलीरसन तक का जिक्र है।












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