Pak: दहेज विरोधी कैम्पेन को लेकर डिजायनर निशाने पर, फोटोशूट में ऐसा क्या जिससे चिढ़े लोग ?

Anti Dowry Campaign Pakistan: इस्लामाबाद। पाकिस्तान में फैशन डिजाइनर अली जीशान के एक अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर भूचाल आया हुआ है। पाकिस्तानी डिजायनर अली जीशान ने संयुक्त राष्ट्र की महिला पाकिस्तान इकाई के साथ मिलकर दहेज के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है। नुमाइश नाम से शुरू किए गए इस अभियान में पाकिस्तानी समाज में शादी की परंपरा के नाम पर होने वाली रूढ़िवादी सोच और महिलाओं की स्थिति का जिक्र किया गया है।

फोटोशूट के जरिए चलाया अभियान

फोटोशूट के जरिए चलाया अभियान

सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर हलचल 'संयुक्त राष्ट्र महिला पाकिस्तान' के ट्विटर हैंडल पर किए गए पोस्ट के बाद शुरू हुई थी। यूएन महिला पाकिस्तान के इस पोस्ट में नुमाइश अभियान के तहत किए गए फोटोशूट की तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। इन तस्वीरों में एक नई नवेली दुल्हन जो पूरी तरह से सजी हुई है उसे एक गाड़ी (बैल या घोड़े से खींची जाने वाली) खींचते हुए दिखाया गया है।

गाड़ी जिन चीजों से भरी हुई है उनमें दहेज के दौरान दिए जाने वाले सामान शामिल है। गाड़ी के ऊपर इन सामानों के ऊपर दूल्हे को भी दिखाया गया है।

यूएन महिला पाकिस्तान के हैंडल से 8 फरवरी को इसी अभियान के तहत एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में दिखाया जाता है कि किस तरह से दुल्हन के माता-पिता खाली गाड़ी लेकर आते हैं। उसे पूरी तरह सामान से भर देते हैं। इसके बाद शादी के जोड़े में सजी दुल्हन के कंधी पर उस गाड़ी को रख दिया जाता है।

यूएन महिला पाकिस्तान ने क्या कहा ?

यूएन महिला पाकिस्तान ने क्या कहा ?

पोस्ट में लिखा गया है कि यूएन महिला पाकिस्तान अली जीशान के दहेज के खिलाफ इस संकल्प का समर्थन करता है। इसके साथ ही इस अभियान को समर्थन करने की मांग भी की है। ट्वीट में दहेज बंद करो, नुमाइश ना लगाओ और जहेजखोरी बंद करो हैशटैग का भी इस्तेमाल किया गया है।

इस अभियान का नाम नुमाइश रखने के पीछे ये संदेश देना है कि आज के जमाने में लोग खुद को बड़ा दिखाने के चक्कर में शादियों में खूब खर्च करते हैं। इसका सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ता है जिनके पास पैसा नहीं है और उनके ऊपर भी ऐसा करने का दबाव पड़ता है।

सोशल मीडिया पर डिजायनर के ऊपर निशाना

सोशल मीडिया पर डिजायनर के ऊपर निशाना

यूएन महिला पाकिस्तान के ट्वीट करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर इसके ऊपर रिएक्शन आने शुरू हो गए। कई सारे यूजर ने दहेज के खिलाफ इस अभियान को लेकर अली जीशान को ही कटघरे में खड़ा किया है। यूजर का कहना है कि जीशान अली के साथ मिलकर दहेज और शादी में दिखावे का विरोध करना पाखंड ही है क्योंकि यही डिजायनर शादियों के लिए महंगे आउटफिट बनाते हैं जिनसे ही शादी में बहुत ज्यादा खर्च पड़ता है।

एक यूजर ने लिखा कि "यूएन महिला पाकिस्तान के ट्वीट ने इस तथ्य को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया कि जब बात शादियों (महंगी) की हो तो अली जीशान जैसे लोग इस समस्या का बड़ा हिस्सा हैं। माता-पिता को कई साल पहले से ही पैसे बचाने की जरूरत होती है ताकि वह दुल्हन के लिए इन डिजायनर्स या इन जैसे दूसरों से ड्रेस खरीद सकें।"

एक दूसरे यूजर ने लिखा कि महंगी और फालतू खर्च वाली शादियों को रोके। लाखों की कीमत के ब्राइडल कपड़े खरीदना बंद करो। पाखंड बंद करो।

वहीं एक यूजर ने यूएन महिला पाकिस्तान के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए पूछा है कि लेकिन उन डियाजनर के बारे में क्या जिन्होंने ये अभियान शुरू किया है और वे शादियों के लिए लाखों की ड्रेस बनाते हैं।

समर्थन में भी बहुत सारे यूजर

समर्थन में भी बहुत सारे यूजर

हालांकि बहुत सारे यूजर ने इस अभियान के लिए अली जीशान और यूएन महिला पाकिस्तान की सराहना की है। एक यूजर ने लिखा "बहुत अच्छी पहल। दहेज की संस्कृति ने पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति नर्क बना रखी है।"

डिजायनर का बचाव करते हुए एक यूजर ने लिखा कि बहुत सारे लोग संदेश तक नहीं पहुंच रहे हैं। हां, ब्राइडल ड्रेस के लिए डिजायनर जो चाहें चार्ज कर सकते हैं लेकिन यहां मुद्दा ये है कि दहेज संस्कृति कितनी खराब है। कोई भी डिजायनर चाहे वह कितनी कीमत लेता हो इस मुद्दे को उठाने का उसे पूरा अधिकार है।

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