करतारपुर कॉरिडोर पर ड्राफ्ट की मंजूरी के लिए मार्च में भारत आएगा पाकिस्तान दल
लाहौर। भारत और पाकिस्तान दोनों ही करतारपुर में स्थित गुरुद्वारे दरबार साहिब को जोड़ने वाले कॉरिडोर को खोलने पर रजामंद हो गए हैं। पाकिस्तान ने गुरुवार को ऐलान किया है कि एक विशेष प्रतिनिधि दल 13 मार्च को भारत आएगा। पाक से आया विशेष प्रतिनिधिदल सिख तीर्थयात्रियों को दर्शन की मंजूरी के लिए बनाए गए फाइनल ड्राफ्ट पर भारत की मंजूरी के लिए देश आएगा। इस कॉरिडोर के जरिए सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में वीजा फ्री एंट्री मिल सकेगी।

भारत को दी 28 मार्च की तारीख
पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी दी है कि पाक की तरफ से भारतीय दल को दौरे के लिए 28 मार्च का प्रस्ताव दिया गया है। फैसल ने यह भी कहा है कि उन्हें भातर से इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। पिछले माह दोनों देशों की ओर से एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया था। पाकिस्तान ने कहा है कि वह गुरु नानक देव की 550वीं जन्मतिथि के मौके पर इस कॉरिडोर को खोलने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने 26 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की नींव गुरदासपुर में रखी थी। इस उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की ओर से रखा गया था। इसके दो दिन बाद 24 नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने लाहौर से 125 किलोमीटर दूर नारोवाल में इस कॉरिडोर की नींव रखी थी।
पाकिस्तान के पंजाब में आता है करतारपुर
करतारपुर, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आता है और नारोवाल जिले में पड़ता है। इस जगह पर सिखों के प्रथम गुरु बाबा नानक देव जी ने अपनी जिंदगी के 18 वर्ष बिताए थे। इसके बाद यहीं पर उन्होंने आखिरी सांस ली थी। यह कॉरिडोर करतारपुर साहिब गुरुद्वारे को पंजाब के गुरदासपुर जिले के तहत आने वाले डेरा बाबा नानक श्राइन से जोड़ता है। रावी नदी पर स्थित करतारपुर साहिब से डेरा बाबा नानक श्राइन की दूरी सिर्फ चार किलोमीटर है। गुरुद्ववारा करतारपुर साहिब पहला गुरुद्वारा है जिसकी स्थापना गुरु नानक ने सन् 1522 में की थी।












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