जानिए साउथ एशियन सैटेलाइट जीसैट 9 की लॉन्चिंग पर पाकिस्तान ने क्या कहा
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीसैट-9 की लॉन्चिंग के साथ ही वर्ष 2014 में काठमांडू में हुई सार्क समिट के दौरान किए एक वादे को पूरा किया है। पाकिस्तान ने उसे अलग पर भारत को दोषी ठहराया।
इस्लामाबाद। शुक्रवार को भारत ने एक कम्यूनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है जिसे साउथ एशियन जीसैट-9 सैटेलाइट नाम दिया गया है। इस सैटेलाइट लॉन्चिंग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना वह वादा पूरा कर दिया है जो उन्होंने वर्ष 2014 में नेपाल के काठमांडू में हुई सार्क समिट के दौरान किया था।

पाक की वजह से बदलना पड़ा नाम
जीएसएलवी-एफ09 के सफल लॉन्च में पीएम मोदी ने सभी सार्क देशों को बधाई दी। जीएसएलवी-एफ09 जीसैट सैटेलाइट्स को लेकर अंतरिक्ष में गया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च हुए इस सैटेलाइट को पीएम मोदी ने सार्क देशों के लिए एक गिफ्ट करार दिया है। सैटेलाइट लॉन्चिंग के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के प्रधानमंत्री तेशेरिंग तोगबे, मालद्वीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने पीएम मोदी को बधाई भी दी। वहीं इस पूरे प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को दूर रखा गया। इस सैटेलाइट लॉन्चिंग पर पाकिस्तान की ओर से प्रतिक्रिया आई है और वह प्रतिक्रया हैरान करने वाली है। पीएम मोदी पहले इस प्रोजेक्ट को सार्क सैटेलाइट नाम देना चाहते थे लेकिन बाद में पाकिस्तान के दबाव की वजह से इसका नाम बदलना पड़ा। अब पाकिस्तान की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आ गई है।
भारत को दिया पाक को बाहर रखने का दोष
पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने भारत पर पाकिस्तान को इस प्रोजेक्ट से बाहर रखने का दोष मढ़ दिया है। जकारिया ने कहा, '18वें सार्क सम्मेलन के दौरान भारत ने सार्क देशों को सैटेलाइट का एक तोहफा देने की पेशकश की थी। इस सैटेलाइट को 'सार्क सैटेलाइट' नाम दिया जाना था। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह सैटेलाइट का निर्माण अकेले ही करेगा, लॉन्च भी अकेले करेगा और ऑपरेट भी अकेले ही करेगा।' जकारिया ने आगे कहा कि पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट पर काम करने का इच्छुक था और भारत के साथ इससे जुड़ी अनुभव शेयर करना चाहता था। लेकिन भारत इस प्रोजेक्ट को साथ मिलकर डेवलप नहीं करना चाहता था और ऐसे में पाकिस्तान के लिए सार्क के तहत इस प्रोजेक्ट का समर्थन करना संभव नहीं था। कुछ लोगों ने अनुमान लगाया है कि पाकिस्तान का डर सैटेलाइट को लेकर संभावित जासूसी की वजह से बढ़ गया है तो वहीं जकारिया ने इसे सिर्फ एक बकवास करार दिया।












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