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Pakistan Elections 2018: क्या शापित है पाकिस्‍तान के पीएम की कुर्सी जो आज तक कोई भी पूरा नहीं कर सका है कार्यकाल?

By Richa B
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    इस्‍लामाबाद। बुधवार को पाकिस्‍तान में चुनाव होंगे और एक बार फिर पाकिस्‍तान की जनता अपने लिए नया प्रधानमंत्री चुनेगी। अब इसे पाकिस्‍तान की राजनीति का दुर्भाग्‍य कहें या नियति कि 70 वर्ष की आजादी के बावजूद आज तक इस देश में जो भी पीएम चुना गया वह कभी भी पांच वर्ष तक शासन नहीं कर पाया। नवाज शरीफ से थोड़ी उम्‍मीदें थीं लेकिन पिछले वर्ष भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बाद उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया। आखिर ऐसी क्‍या वजह रही कि यहां पर हर पीएम को पांच वर्ष से पहले ही अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ गया है। जानिए पाकिस्‍तान के सभी प्रधानमंत्रियों के इसी बैड लक के बारे में। ये भी पढ़ें-PakistanElections 2018: क्‍या वाकई इमरान खान हैं सेना के चहेते 

    पीएम की हत्‍या तक हुई है पाक में

    पीएम की हत्‍या तक हुई है पाक में

    सन् 1947 में बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्‍तान जब से अलग हुए तब से ही दक्षिण एशिया के इस देश के राजनीतिक हालातों में उथल-पुथल जारी रही। चार बार यहां पर लोकतांत्रिक तरीके चुनी गई सरकार को तख्‍तापलट की वजह से सत्‍ता से बेदखल कर दिया गया। यहां के एक प्रधानमंत्री की हत्‍या हो गई जबकि एक प्रधानमंत्री को कोर्ट के फैसले बाद फांसी पर लटका दिया गया। 12 पीएम को राष्‍ट्रपति ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पद से हटा दिया तो वहीं कुछ पीएम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपनी सत्‍ता छोड़नी पड़ी।

    पहले पीएम थे लियाकत अली खान

    पहले पीएम थे लियाकत अली खान

    15 अगस्‍त 1947 को लियाकत अली खान ने पाकिस्‍तान के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली लेकिन 16 अक्‍टूबर 1951 को रावलपिंडी में उनकी हत्‍या कर दी गई। लियाकत अली खान चार वर्ष दो महीने और दो दिन तक पाकिस्‍तान के पीएम रहे। इसके बाद पाकिस्‍तान के दूसरे पीएम बने ख्‍वाजा नजीमुद्दीन और उन्‍होंने 17 अक्‍टूबर 1951 को पीएम पद की शपथ ली। लेकिन डेढ़ वर्ष के बाद यानी सात अप्रैल 1953 को गर्वनर जनरल मलिक गुलाम मुहम्‍मद ने उनकी सरकार को भंग कर दिया और उन्‍हें अपनी सत्‍ता से हाथ धोना पड़ा।

    राष्‍ट्रपति के साथ मतभेद

    राष्‍ट्रपति के साथ मतभेद

    इसके बाद 17 अप्रैल 1953 को मुहम्‍मद अली बोगरा ने जिम्‍मा संभाला और उन्‍हें भी 1954 में हटा दिया गया। हालांकि उन्‍हें फिर से पीएम का पद सौंपा गया लेकिन उनके पास बहुमत नहीं था और ऐसे में गर्वनर जनरल सिंकदर मिर्जा ने साल 1955 में उनकी सरकार को भंग कर दिया। फिर 1955 में चौधरी मुहम्‍मद अली पाकिस्‍तान के पीएम बने लेकिन इस्‍कंदर मिर्जा के साथ मतभेदों के चलते उन्‍हें 12 सितंबर 1956 को उन्‍हें अपने पद से हाथ धोना पड़ गया। दरअसल मिर्जा को 1956 के सविंधान के तहत राष्‍ट्रपति बनाया गया था। अवामी लीग के हुसैन शहीद सुहावर्दी ने पाकिस्‍तान को साल 1954 के चुनावों में जीत दिलाई थी। वह मुस्लिम लीग के अलावा किसी और पार्टी के पहले नेता थे जिन्‍हें चुनावों में जीत मिली थी। साल 1956 में उन्‍हें पीएम बनाया गया लेकिन साल 1957 में उन्‍हें भी मिर्जा के साथ मतभेदों के चलते पद से हटा दिया गया।

    फिर हुआ तख्‍तापलट

    फिर हुआ तख्‍तापलट

    इसके बाद इस्‍कंदर मिर्जा ने सुहारवर्दी के इस्‍तीफ के बाद इब्राहीम इस्‍माइल चुंदरीगर को प्रधानमंत्री नियुक्‍त किया और वह करीब दो माह तक पीएम रहे। दिसंबर 1957 में उन्‍होंने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। इसके बाद मिर्जा ने फिरोज खान को पाकिस्‍तान का सांतवा पीएम नियुक्‍त किया। साल 1958 में जनरल अयूब खान ने तख्‍तापलट किया और देश में मार्शल लॉ लगा दिया गया। 13 वर्ष बाद मिलिट्री रूल खत्‍म हुआ और जुल्लिफकार अली भुट्टो सत्‍ता में आए।विशेष व्‍यवस्‍था के तहत भुट्टो तब तक पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति बने रहे जब तक 1973 में पाकिस्‍तान का नए संविधान को मंजूरी नहीं मिल गई। साल 1973 के बाद उन्‍होंने राष्‍ट्रपति के पद से इस्‍तीफा दिया और देश के पीएम बन बैठे।

    भुट्टो को मिली फांसी

    भुट्टो को मिली फांसी

    साल 1977 में पाकिस्‍तान में चुनाव हुए और भुट्टो चुनावी मैदान में उतरे। इसी वर्ष जुलाई 1977 में जनरल मुहम्‍मद जिया उल हक ने तख्‍तापलट किया और देश की बागडोर अपने हाथों में ले ली। साल 1979 में उन्‍हें सेना और न्‍यायपालिका की मिलीभगत के चलते फांसी पर लटका दिया गया। साल 1985 में पाकिस्‍तान में नॉन-पार्टी इलेक्‍शन हुए और मुहम्‍मद खान जुनेजो को पाक पीएम चुना गया। उस समय पाकिस्‍तान में मिलिट्री का शासन था और क्‍यों वह राजनेता था सेना को हमेशा उनसे एक खतरा बना रहता। 29 मई 1988 को उनकी सरकार को हटा दिया गया। जुंजेओ ने रावलपिंडी में ओझिरी कैंप हादसे में जांच के आदेश दिए थे जिसके बाद ही उनकी सरकार सत्‍ता से बेदखल होना पड़ गया। इस घटना में मिलिट्री डिपो में ब्‍लास्‍ट की वजह से 100 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हो गए थे।

    बेनजीर बनीं देश की पहली महिला पीएम

    बेनजीर बनीं देश की पहली महिला पीएम

    साल 1988 में पाकिस्‍तान में आम चुनाव हुए और दो दिसंबर 1988 को जुल्लिफकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो देश की पहली महिला पीएम बनीं। साल 1989 में उनकी पा‍र्टी पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी ने बेनजीर के खिलाफ आए महाभियोग को खारिज कर दिया। लेकिन छह अगस्‍त 1990 को राष्‍ट्रपति गुलाम इश्‍हाक खान ने आर्टिकल 58 के तहत खुद को मिली ताकत का प्रयोग करते हुए भुट्टो को पद से हटा दिया। इसके बाद इसी वर्ष नवाज शरीफ को पहली बार पीएम बनने का मौका मिला। उनकी सरकार को भरी साल 1993 में राष्‍ट्रपति गुलाम इश्‍हाक खान ने हटा दिया। हालांकि बाद सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद नवाज सत्‍ता में फिर लौटे।

    नवाज भी हुए तख्‍तापलट का शिकार

    नवाज भी हुए तख्‍तापलट का शिकार

    18 जुलाई 1993 को तत्‍कालीन पाक आर्मी चीफ वाहीद काकर ने नवाज शरीफ और राष्‍ट्रपति खान को अपने पद से हटने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद 1993 में भुट्टो फिर से पीएम बनीं और दूसरी बार इस जिम्‍मेदारी को संभाला। लेकिन राष्‍ट्रपति फारूक लागहरी ने नवंबर 1996 में आर्टिकल 58 का प्रयोग करते हुए उन्‍हें पद से हटा दिया। पाकिस्‍तान में फरवरी 1997 में चुनाव हुए और नवाज को फिर से पाक का पीएम बनने का मौका मिल गया। उनकी किस्‍मत फिर से यहां मात खा गई 12 अक्‍टूबर 1999 को तत्‍कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्‍तापलट किया और देश में आपातकाल लगा दिया। मुशर्रफ ने इसके साथ ही नवाज को पाकिस्‍तान की सत्‍ता से बाहर कर दिया।

    मुशर्रफ के कार्यकाल में तीन पीएम

    मुशर्रफ के कार्यकाल में तीन पीएम

    मुशर्रफ के शासनकाल में पाकिस्‍तान में तीन पीएम हुए, मीर जफरुल्‍ला खान जमाली, चौधरी शुजात हुसैन और शौकत अजीज। जमाली ऐसे पीएम रहे जिन्‍होंने 19 माह तक शासन किया। चौधरी शुजात दो माह तक पीएम रहे इसके बाद अगस्‍त 2004 में मुशर्रफ के दोस्‍त शौकत अजीज देश के पीएम बन गए। साल 2008 में पाकिस्‍तान में फिर से चुनाव हुए और पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी सत्‍ता में आई। इसके बाद युसूफ रजा गिलानी को देश का पीएम बनने का मौका मिला। वह भी भ्रष्‍टाचार में दोषी पाए गए और गिलानी को सुप्रीम कोर्ट ने पद से हटा दिया। गिलानी ने 25 मार्च 2008 को देश का शासन संभाला और वह 19 जून 2012 तक देश के पीएम रहे। इसके बाद जून 2012 में रजा परवेज अशरफ ने पाकिस्‍तान का जिम्‍मा संभाला और मार्च 2013 तक पीएम रहे।

    जारी रहा नवाज का दुर्भाग्‍य

    जारी रहा नवाज का दुर्भाग्‍य

    साल 2013 में चुनाव हुए और नवाज शरीफ को तीसरी बार पाकिस्‍तान का पीएम बनने का मौका मिला। वह अपना कार्यकाल पूरा करते, इससे पहले ही पनामा पेपर्स में उनका नाम आ गया। पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्‍हें हटा दिया और वह भी पाक के उन पीएम की लिस्‍ट में आ गए जो अपना कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर सके हैं।

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    English summary
    Pakistan Elections 2018: Not a single Prime Minister in Pakistan has completed his full five year term.

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