शहीद-ए-आजम भगत सिंह की बेगुनाही साबित करेगा पाकिस्तान
लाहौर। आजादी की लड़ाई के समय ब्रिटिश अधिकारी जेपी सैंडर्स की हत्या के दोषी करार दिये गये स्वतंत्रता सेनानी शहीद-ए-आजम भगत सिंह को निर्दोष साबित करने के लिए पाकिस्तान की एक कोर्ट बुधवार से मामले की सुनवाई करेगी।

भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई थी। फांसी के 85 वर्ष बाद उन्हें बेगुनाह साबित करने पर सुनवाई होगी लेकिन भारत में नहीं पाकिस्तान में।
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लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इजाजुल एहसन ने न्यायमूर्ति खालिद महमूद की अध्यक्षता में एक खंड पीठ बनाई है, जो तीन फरवरी से मामले की सुनवाई शुरू करेगी।
इस याचिका पर अंतिम सुनवाई मई 2013 में न्यायमूर्ति शुजात अली खान ने की थी। उन्होंने इस मामले को एक बड़े पीठ को सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया था।
17 दिसंबर 1928 को हुई इस घटना की सुनवाई के लिये भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने नवंबर में लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
कुरैशी ने कहा था कि भगत सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अखंड भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कोर्ट से कहा कि अविभाजित भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले भगत सिंह को खुद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी श्रद्धांजलि दी थी।
वह पाक के भी स्वतंत्रता सेनानी हैं। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के कारण 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी।












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