पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया आदेश, इमरान खान और पोंपेयो की टेलीफोन कॉल के रीडआउट को सही करें
एक असाधारण कदम के तहत पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि वह तुरंत उस रीडआउट को सही करें जो अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है।
इस्लामाबाद। एक असाधारण कदम के तहत पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि वह तुरंत उस रीडआउट को सही करें जो अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। इस रीडआउट में इस बात का जिक्र है कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा है कि वह देश में मौजूद सभी आतंकियों के खिलाफ 'निर्णायक कार्रवाई' करें। साथ ही अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिक अदा करे।

अमेरिका ने कहा पोंपेयो ने की आतंकवाद पर बात
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इमरान के साथ बातचीत में पोंपेयो ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई में इस्लामाबाद की क्या अहमियत है। साथ ही उन्होंने अफगान शांति प्रक्रिया के बारे में भी इमरान से जिक्र किया। वहीं, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि पोंपेयो ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई भी दी। दोनों नेताओं ने फोन पर वार्ता के समय आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। लेकिन विदेश मंत्रालय की मानें तो पोंपेयो ने खान से वार्ता के समय 'पाकिस्तान में काम कर रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई' का कोई भी जिक्र पोंपेयो ने नहीं किया। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा, 'अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री पोंपेयो की आज टेलीफोन वार्ता पर तथ्यात्मक तौर पर गलत बयान जारी किया गया है और पाकिस्तान को इस पर एतराज है।' फैसल ने ट्विटर पर लिखा कि फोन कॉल में पाकिस्तान की सरजमीं से काम रहे आतंकियों के बारे में कोई जिक्र नहीं था। फैसल की मानें तो इसे तुरंत सही किया जाना चाहिए।
सितंबर में पोंपेयो जाएंगे पाकिस्तान
पाकिस्तान की मीडिया की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि माइक पोंपेयो सितंबर के पहले हफ्ते में इस्लामाबाद जा सकते हैं। पोंपेयो यहां पर नए प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ वार्ता करेंगे। पांच सितंबर को पोंपेयो पाकिस्तान पहुंच सकते हैं। वह पहले ऐसे विदेशी नेता होंगे जो पीएम बनने के बाद इमरान खान से मुलाकात करेंगे। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने कई अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी थी। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रिश्ते इस वर्ष जनवरी में और बिगड़ गए थे। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाक पर आरोप लगाया था कि अमेरिका को बदले में हमेशा झूठ दिया गया है और आज भी पाकिस्तान आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना है। अमेरिकी कांग्रेस की ओर से एक बिल भी पास किया गया था। इस बिल में पाकिस्तान को रक्षा के लिए दी गई मदद को सिर्फ 150 मिलियन डॉलर कर दिया गया था। जबकि पाकिस्तान को प्रति वर्ष एक बिलियन डॉलर की रकम अमेरिका से मिली थी।












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