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अपने पर बीती तो नवाज शरीफ ने आतंकवाद को करार दिया कैंसर

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इस्‍लामाबाद। 16 दिसंबर को पेशावर के एक सैनिक स्कूल में आतंकवादी हमले के मद्देनजर हुई है, जिसमें 140 से ज्‍यादा बच्‍चे और टीचर्स की मौत हो गई थी, उस के बाद पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक संसदीय कमेटी की मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में जहां नवाज ने आतंकवाद के कई पहलूओं की बात की तो उन्‍होंने आतंकवाद को 'कैंसर' तक करार दे डाला।

Nawaz Sharif

अब नवाज को अहसास हुआ दर्द का

पीएम नवाज शरीफ ने कहा कि देश में आतंकवाद को कुचलने के लिए माकूल उपाय करने का समय आ चुका है। पाकिस्तान में बुधवार को संसदीय कमेटी की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि जिस प्रकार बच्चों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया, मुझे नहीं लगता कि देश में या पूरी दुनिया में इसकी कोई मिसाल है। देश असामान्य परिस्थितियों से गुजर रहा है और अगर कठोर उपाय नहीं किए गए, तो देश को यह स्वीकार्य नहीं होगा।

आतंकवाद कैंसर, इसका इलाज जरूरी

नवाज शरीफ के मुताबिक आतंकवाद कैंसर जैसी एक बीमारी है और यदि अभी इसका इलाज नहीं किया गया, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। यह जिम्मेदारी हम सबकी है और हमें उनके खिलाफ कठोर निर्णय लेने होंगे, जो निर्दोष बच्चों का कत्ल कर रहे हैं और उनके दिल में दया नाम की कोई चीज नहीं है।

वहीं, पाक के आर्मी चीफ जनरल राहील शरीफ ने कहा कि साहसिक निर्णय लेने तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन का समय आ चुका है। मीटिंग को एड्रेस करते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि एकता के माध्यम से देश में आतंकवाद तथा उग्रवाद पर विजय प्राप्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कैंसर से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है। सेना प्रमुख ने आश्वस्त किया कि पाकिस्तान सेना आतंकवाद के खतरे को कुचलने में सरकार का पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कबायली इलाकों में जर्ब-ए-अज्ब अभियान में प्रभावी ढंग से प्रगति हो रही है।

इससे पहले, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू (पीएमएल-क्यू) तथा कौमी वतन पार्टी (क्यूडब्ल्यूपी) ने पाकिस्तान में सैन्य अदालतों के गठन का समर्थन किया। जबकि, जमात-ए-इस्लामी (जेआई), मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) तथा जमियत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) ने सैन्य अदालतों के गठन पर आपत्ति जताई।

आर्मी कोर्ट की जगह मार्शल लॉ की वकालत

इस्लामाबाद स्थित प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निवास पर हुई बैठक के दौरान मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने देश में और सैन्य अदालतों के गठन पर आपत्ति दर्ज कराई। एमक्यूएम अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन ने मीडिया से कहा कि आर्मी कोर्ट के गठन से बेहतर है कि देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया जाए, जो अलोकतांत्रिक है।

अब तक 100 बार मार्शल लॉ लगाया जा चुका है। इसलिए एक बार और लगा देना कोई बड़ी बात नहीं होगी। बुधवार शाम वह ब्रिटेन से एक टेलिफोनिक म‍ीडिया काफ्रेंस को एड्रेस कर रहे थे। इसी बीच, अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) ने इस मुद्दे पर और अधिक समय की मांग की।

एएनपी के गुलाम बिलावर ने कहा कि आर्मी कोर्ट के गठन पर विचार के लिए हमें कुछ और समय की जरूरत है। हम सर्वप्रथम कानून पर गौर फरमाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सैन्य अदालत पर उनकी पार्टी के दृष्टिकोण को नजरंदाज करें, तो आतंकवाद से मुकाबले के लिए देश को अपने हर संसाधन को एक साथ लाना होगा।

पीएमएल-क्यू नेता मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा कि आर्मी कोर्ट लगाकर आतंकवादियों को तत्काल सजा सुनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सफलता के लिए अमेरिका ने भी यही कदम उठाया था।

द न्यूज इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से कहा कि आर्मी कोर्ट्स का गठन एक निश्चित समय के लिए होगा और वह आतंकवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई करेगी।

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English summary
Nawaz Sharif says Pakistan is united against terrorism after Peshawar terror attack.
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