पाकिस्‍तान चुनाव: पार्टियों ने दिए इस बार ज्‍यादा महिलाओं को टिकट लेकिन तोड़ा चुनाव आयोग का कानून

पाकिस्‍तान में 25 जुलाई को संसदीय चुनाव होने हैं और इस बार यहां की हर चुनावी पार्टी ने वादा किया है कि सभी नागरिकों को संविधान के नियम 25 के तहत समान अधिकार दिए जाएंगे। पाकिस्‍तान में राजनीतिक पार्टियों ने इस बार अपने इस वादे को उम्‍मीदवारों को टिकट देने में भी पूरी करने की कोशिश की है।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान में 25 जुलाई को संसदीय चुनाव होने हैं और इस बार यहां की हर चुनावी पार्टी ने वादा किया है कि सभी नागरिकों को संविधान के नियम 25 के तहत समान अधिकार दिए जाएंगे। पाकिस्‍तान में राजनीतिक पार्टियों ने इस बार अपने इस वादे को उम्‍मीदवारों को टिकट देने में भी पूरी करने की कोशिश की है। इस बार पाकिस्‍तान के चुनावी मैदान में महिला उम्‍मीदवारों की संख्‍या पिछले सभी चुनावों की तुलना में ज्‍यादा है। पाक अखबार द डॉन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इलेक्‍शन एक्‍ट 2017 का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिसकी वजह से राष्‍ट्रीय और प्रांतीय चुनावों में कम से कम पांच प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने की कोशिशें की गई हैं।

तीन बड़ी पार्टियों ने नहीं माना कानून

तीन बड़ी पार्टियों ने नहीं माना कानून

पाकिस्‍तान में तीन पार्टियां सबसे बड़ी हैं-पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), इमरान खान की पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और बिलावल भुट्टो की पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी (पीपीपी)। लेकिन इन तीनों ही पार्टियों की ओर से पांच प्रतिशत वाले नियम को बमुश्किल माना गया है। डॉन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पार्टियों ने बहुत कम महिला उम्‍मीदवारों को टिकट दिया है। इन पार्टियों की ओर से उम्‍मीदवारों की जो लिस्‍ट जारी की गई है उसमें महिलाओं की संख्‍या कुछ इस तरह से है-पीपीपी के 176 उम्‍मीदवारों में से 12 महिलाएं हैं और यह आंकड़ा 6.8 प्रतिशत है। वहीं पीटीआई ने 244 उम्‍मीदवार उतारे हैं जिसमें से 14 महिलाएं हैं और आंकड़ा 5.7 प्रतिशत है। वहीं पीएमएल-एन ने अब तक 125 उम्‍मीदवारों का ऐलान किया है और जिसमें से सिर्फ पांच यानी चार प्रतिशत महिलाएं हैं।

2013 में 61 महिलाओं ने लड़ा चुनाव

2013 में 61 महिलाओं ने लड़ा चुनाव

इन पार्टियों ने प्रांतीय चुनावों में भी इसी पैटर्न को फॉलो किया है। इमरान खान की पीटीआई ने बलूचिस्‍तान और खैबर पख्तूनख्‍वा में तो नियम को ही दरकिनार कर दिया है। इमरान खान की पार्टी ने बलूचिस्‍तान में 40 उम्‍मीदवार में से सिर्फ एक महिला को ही टिकट दिया है। चुनावों के कानूनों में बदलाव करने वाली कमेटी के एक सदस्‍य की मानें तो इलेक्‍शन कमीशन इन पार्टियों के खिलाफ नियम का पालन न करने पर कार्रवाई कर सकता है। साल 2013 में जब पाकिस्‍तान में चुनाव हुए थे तो पीपीपी की ओर से 13, पीएमएल-एन की तरफ से आठ और पीटीआई की तरफ से छह महिलाओं को टिकट दिए गए थे। उस वर्ष कुल 61 महिलाओं को चुनावी टिकट दिए गए थे।

सिर्फ 41 महिलाओं को मिला था टिकट

सिर्फ 41 महिलाओं को मिला था टिकट

साल 2008 में सिर्फ 41 महिलाएं ही चुनरावी मैदान में थीं जबकि 31 महिलाएं निर्दलीय प्रत्‍याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही थीं। साल 2002 में पाकिस्‍तान में जनरल परवेज मुशर्रफ ने महिलाओं के प्रतिनिधित्‍व में इजाफा होने की उम्‍मीद में नेशनल और प्रांतीय सभाओं में महिलाओं के लिए कई सीट्स घोषित कर डाली थी। लेकिन तब मुशर्रफ के इस कदम का पाक की सिविल सोसायटी और राजनीति के पंडितों ने खासा विरोध किया था। उनका कहना था कि महिलाओं को राजनीति में आने के लिए पुरुषों के बराबर ही मौके मिलने चाहिए न कि उन्‍हें चैरिटी की तरह टोकन स्‍वरूप टिकट दिए जाएं। वर्तमान समय में पाकिस्‍तान की नेशनल एसेंबली में 342 सीटें हैं जिनमें से 60 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

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