पाकिस्तान के टीवी चैनल पर ग्लोबल आतंकी सैयद सलाउद्दीन ने कुबूली भारत में आतंकी हमलों की बात
इस्लामाबाद। हाल ही में अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के चीफ सैयद सलाउद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया है। यह आतंकी पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल जीओ टीवी पर नजर आया। इस चैनल को दिए खास इंटरव्यू में सलाउद्दीन ने बिना झिझक इस बात को कुबूल किया है कि उसने और उसके संगठन ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की ओर से इस बात की जानकारी दी गई।

क्या कहा सलाउद्दीन ने
सलाउद्दीन ने इंटरव्यू में कहा, 'अब तक हमारा ध्यान भारत की सेना पर था। सभी ऑपरेशंस जो हुए या हो रहे हैं, वे सिर्फ सेनाओं और उनके संस्थानों को ध्यान में रखकर अंजाम दिए गए।' दो दिन पहले यानी शनिवार को सलाउद्दीन ने पीओके के मुजफ्फराबाद में एक रैली का आयोजन किया था। उसने इस रैली में अपने लड़ाकों से अपील की थी कि वे उन सभी मिलिट्री संस्थानों को निशाना बनाएं जो नागरिकों का विरोध करते हैं। पाकिस्तान के अखबार नेशन की ओर से इस बात की जानकारी दी गई। पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से सलाउद्दीन को ग्लोबल आतंकी घोषित करने वाले ऐलान को नाइंसाफी करार दिया है। पाकिस्तान का मानना है कि सलाउद्दीन के कश्मीरियों के हक की लड़ाई लड़ रहा है। वहीं शनिवार को जो रैली हुई उसमें सलाउद्दीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उसके खिलाफ एक्शन लेने पर पागल तक करार दे दिया है। उसने कहा कि ट्रंप प्रशासन का मूर्खतापूर्ण फैसला भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक गिफ्ट था।
ट्रंप को कहा था पागल
पिछले हफ्ते पीएम मोदी अमेरिका की यात्रा पर थे और यहां पर उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से पहली मुलाकात की। अमेरिका ने पीएम मोदी के यहां पहुंचने से पहले ही सलाउद्दीन को आतंकी घोषित कर दिया था। अमेरिका की उन लोगों को ग्लोबल आतंकी घोषित करता है जिन्होंने आतंकी वारदातों को अंजाम दकर अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया हो या फिर अमेरिका की विदेश नीति, अर्थव्यवस्था या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हों। सलाउद्दीन ने रैली में कहा, 'ट्रंप के फैसले को अगर किसी कोर्ट में चुनौती दी जाए तो कोर्ट इस खारिज कर देगा। किसी भी पश्चिम देश ने वह नहीं किया जो अभी तक इस पागल डोनाल्ड ट्रंप ने कर डाला है।' सलाउद्दीन के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की मूर्खता न तो उसकी हिम्मत को कम कर सकती है और न ही कश्मीर में आजादी के लिए जारी उसके संघर्ष को रोक सकती है।












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