भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले हामिद गुल का निधन

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान इंटलीजेंस एजेंसी के पूर्व चीफ और पाक सेना के रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हामिद गुल की रविवार को मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ब्रेन हैमरेज की वजह से उनकी मौत हुई है।

उन्‍हें मुरे के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल लेकर जाया गया लेकिन हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई थी। 79 वर्ष के गुल वर्ष 1954 में पाक सेना में शामिल हुए थे। सन 1965 की लड़ाई में वह टैंक कमांडर रहे थे। गुल वर्ष 1987 से वर्ष 1989 तक आईएसआई के चीफ रहे थे। 1992 में रिटायर होने वाले गुल ने पिछले हफ्ते ही भारत पर परमाणु हमले की धमकी दी थी।

हमेशा उगला भारत के खिलाफ जहर

आईएसआई के चीफ का पद संभालते ही गुल ने भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया था। गुल को हमेशा से ही 'फादर ऑफ तालिबान' कहा जाता है। भारत के खिलाफ उनकी नीतियां काफी सख्‍त रही थीं। रिटायरटमेंट के बाद से ही वह भारत को लेकर हमेशा विवादित टिप्‍पणी करते रहते थे।

यहां तक कि पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने तो उन्‍हें एक बार इंटरव्‍यू में आतंक का राजनीतिक विचारक तक करार दे डाला था।

लादेन को नहीं मानते थे आतंकी

अफगानिस्‍तान पर सोवियत के अधिग्रहण के समय गुल ने अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसी सीआईएस के साथ मिलकर काम किया था। अमेरिका के साथ उनके रिश्‍ते उस समय खराब हुए जब उन्‍होंने अमेरिका को दिए अपने वादों को पूरा नहीं किया। युद्ध के बाद उन्‍होंने मदद की मांग की और जब यह नहीं मिली तो उन्‍होंने तालिबान को समर्थन देना शुरू कर दिया।

गुल ने यहां तक कि अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन के लिए भी कई तरह के बयान दिए और लादेन को आतंकी तक मानने से इंकार कर दिया था।

वर्ष 2007 में कराची में हुए बम धमाकों के बाद पूर्व पाकिस्‍तानी पीएम बेनजीर भुट्टो ने उन्‍हें इसके लिए जिम्‍मेदार तक ठहरा दिया था।

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