चीन तो छोड़िये, दुबई, कतर और सऊदी जैसे मुस्लिम देशों ने मदद नहीं की, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने जताया दुख

इस्लामाबाद, 31 जुलाईः अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व आंतरिक मंत्री शेख राशिद अहमद ने कहा कि देश आर्थिक संकट में फंस गया है। उन्होंने देश के आर्थिक संकट से निपटने में विफल रहने के लिए संघीय सरकार की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की सहायता के लिए अब तक कोई भी मित्र देश नहीं आया है।

किसी भी देश ने नहीं की मदद

किसी भी देश ने नहीं की मदद

शेख राशिद अहमद ने एक ट्वीट में कहा कि "यहां तक कि चीन, दुबई, कतर और सऊदी अरब भी पाकिस्तान की सहायता के लिए नहीं आए और न ही आईएमएफ का बेलआउट पैकेज आया"। शेख राशिद अहमद ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान को बाहर करने वाले अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने का निर्णय लंदन में लिया गया था।

श्रीलंका जैसी हो सकती है पाकिस्तान की हालत

श्रीलंका जैसी हो सकती है पाकिस्तान की हालत

बतादें कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस देश की स्थिति कभी भी श्रीलंका जैसी हो सकती है। आर्थिक स्वास्थ्य का निर्धारण करने वाली वैश्विक एजेंसियों ने भी कुछ-कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। मूडी, फिच और एस एंड पी ग्लोबल ने पाकिस्तान की लंबे समय के लिए रेटिंग घटाकर स्थिर से नकारात्मक कर दी है।

स्वीकृत ऋण भी नहीं दे रहा आइएमएफ

स्वीकृत ऋण भी नहीं दे रहा आइएमएफ

लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति के कारण ही आइएमएफ स्वीकृत ऋण की निकासी नहीं कर रहा है। इसलिए ऋण के लिए सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा तक को अमेरिका से आग्रह करना पड़ रहा है। निक्केई एशिया के मुताबिक, पाकिस्तानी जनरल बावजा ने कर्ज के लिए व्हाइट हाउस और अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट से संपर्क किया है। जानकारी के मुताबिक बाजवा ने कहा है कि अमेरिका आईएमएफ पर 1.2 बिलियन डॉलर के रिलीफ पैकेज की सप्लाई के के लिए दबाव बनाए। इसके अलावा पुराने कर्ज को चुकाने की समय अवधि को भी बढ़ाया जाए।

वित्त मंत्रालय को उठाने होंगे कड़े कदम

वित्त मंत्रालय को उठाने होंगे कड़े कदम

प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने उन बिंदुओं को सार्वजनिक किया है कि जिनके चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है। बताया है कि पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय वे कदम नहीं उठा पा रहा है जिससे देश की गिरती अर्थव्यवस्था में रुकावट आ सके। इन क्रेडिट एजेंसियों ने कहा है कि वित्त मंत्रालय अगर कड़े कदम उठाए तो देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकती है और उसकी रेटिंग में भी सुधार हो सकता है।

कड़े कदम उठाने से डर रही सरकार

कड़े कदम उठाने से डर रही सरकार

बता दें कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को आर्थिक पैकेज बहाल करने के लिए कई कड़ी शर्तें रखी हैं। आईएमएफ ने कहा है कि इस्लामाबाद का आर्थिक पैकेज बहाल करने के लिए बिजली की दरें बढ़ानी होगी और पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगाना होगा। लेकिन सरकार इन शर्तों पर पूरी तरह से अमल करने से परहेज कर रही है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान की जनता भड़क जाएगी। आने वाले वक्त में शहबाज शरीफ सरकार के लिए और मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

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