'नाजीवाद-फासीवाद और हिंदुत्व में कहां है समानता?', शारदा यूनिवर्सिटी एग्जाम पेपर में पूछे गए सवाल पर हुआ बवाल
'नाजीवाद-फासीवाद और हिंदुत्व में कहां है समानता?', शारदा यूनिवर्सिटी एग्जाम पेपर में पूछे गए सवाल पर हुआ बवाल
नोएडा, 07 मई: शारदा यूनिवर्सिटी में मिड टर्म एग्जाम चल रहे हैं। शुक्रवार 06 मई को बीए पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स (सेमेस्टर-2) एग्जाम हुआ था, जिसमें छात्रों से एक अजीबोगरीब सवाल पूछा गया। यूनिवर्सिटी की तरफ से जो सवाल पूछा गया था, उसपर अब सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई। यूजर्स शारदा यूनिवर्सिटी पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। तो इस विवाद में भाजपा भी कूद गई है। भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा पेपर में पूछे गए सवाल पर ट्वीट कर नाराजगी जाहिर की है।

भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में लिखा, 'यूनिवर्सिटी का नाम 'शारदा' पर कृत्य देखिए कि परीक्षा में छात्रों को 'हिन्दुत्व' को अनिवार्य रूप से फासी और नाजीवाद के समकक्ष सिद्ध करने के लिए कहा जा रहा है। यह प्रश्नपत्र कथित रूप से किसी मुस्लिम शिक्षक द्वारा बनाया गया है. (Q no. 6)'। आपको बता दें कि यूनिवर्सिटी द्वारा पूछ गया सवाल कुछ इस तरह है, 'क्या आप हिंदू राइट विंग (हिंदुत्व), फासिज्म और नासिज्म में समानता पाते हैं?'
सोशल मीडिया पर हिंदूवादी संगठन और समर्थक विश्वविद्यालय का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि शारदा विश्वविद्यालय हिंदी विरोधी मानसिकता का प्रचार प्रसार कर रही है। हिंदुत्व को नाजीवाद और फासीवाद जैसा बताकर छात्रों गलत शिक्षा दी जा रही है। इस सवाल पर जब विवाद बढ़ा तो विश्वविद्यालय की ओर से जांच बैठा दी और पेपर बनाने वाली कमेटी को सस्पेंड कर दिया है।
शारदा विश्वविद्यालय की ओर से आए बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय को खेद है कि ऐसी घटना हुई है जिसमें सामाजिक कलह को भड़काने की क्षमता हो सकती है। विश्वविद्यालय हर उस विचारधारा के खिलाफ है जो हमारी राष्ट्रीय पहचान और संस्कृति को बिगाड़े। एक उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में हम सभ्यता के पुनरुद्धार के बड़े मिशन के लिए प्रतिबंध हैं जो हमारे धर्म, परंपरा, इतिहास और संस्कृति का सबसे अच्छा उत्सव मनाता है जिसने न केवल भारत के विचार को बल्कि दुनियाभर में मानव ज्ञान के सभी पहलुओं को आकार दिया है।












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