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Greater Noida: प्राधिकरण के दोनों गेटों पर किसानों का कब्ज़ा, कहा- "मुद्दों को हल करके ही दम लेंगे।"

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सामने मंगलवार को किसानों का आंदोलन उग्र हो गया। किसान पिछले कई महीनों से मुआवजा, आबादी और 10 फीसदी भूखंडों की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। किसानों की मांग पूरी न होने पर और प्रशासन का ढुलमुल रवैया देखकर किसान आक्रोशित हो गए और 12 सितंबर को प्राधिकरण के दोनों गेट बंद कर कब्जा करने की घोषणा कर दी।

किसानों का दोनों गेटों पर कब्जा
घोषणा के बाद मंगलवार को किसान संगठनों ने प्राधिकरण पर हल्ला बोल दिया और दोनों गेटों पर कब्जा कर बैठ गए। किसान नेता रुपेश वर्मा और सुखबीर खलीफा समेत दर्जनों के संसाधनों ने एकजुट होकर प्राधिकरण के खिलाफ हुंकार भरी और कहा कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होगी, वह यहां से नहीं उठंगे।

Farmers occupied both the gates of Greater Noida authority during protest

"आंदोलन खत्म नहीं होगा"
हालांकि पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारी किसानों के बीच जाकर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याएं दूर नहीं होगी, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

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    Greater Noida: प्राधिकरण के दोनों गेटों पर किसानों का कब्ज़ा, कहा- 'मुद्दों को हल करके ही दम लेंगे
    Farmers occupied both the gates of Greater Noida authority during protest

    "किसानों को थकाने का प्रयास"
    इसी बीच किसानों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई है। मौके पर तनाव का माहौल है। आला अधिकारी किसानों को रोकने में लगे हुए हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि 'हम प्राधिकरण को पर्याप्त समय दे चुके हैं। लेकिन प्राधिकरण और शासन किसानों की परीक्षा ले रहा है। किसानों के वाजिब मुद्दों को लटकाकर और आंदोलन को लंबा खींचकर किसानों को थकाने का प्रयास किया जा रहा है।

    Farmers occupied both the gates of Greater Noida authority during protest

    "किसानों को भ्रमित करने की कोशिश"
    किसान सभा के महासचिव हरेंद्र का कहना है कि "प्राधिकरण के अधिकारी फर्जी 'मीटिंग मिनट', जो उन्होंने 6 तारीख की वार्ता वाले दिन तैयार की थी, किसान सभा के लोगों को दिखाने और देने से इनकार कर दिया था। उसी मीटिंग मिनट को जारी किया गया है और लेखपालों की गांव में ड्यूटी लगाई गई है कि वे किसानों को भ्रमित करें और उन्हें समझाएं कि किसानों के मुद्दे हल हो गए हैं। जबकि किसानों के मुद्दे अभी तक भी हल नहीं हुए हैं।"

    "मुद्दों को हल कर करके ही दम लेंगे।"
    उनका कहना है कि "किसानों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन किसान पूरी तरह जागरूक हैं और प्राधिकरण की किसी चाल में अबकी बार फंसने वाले नहीं है। यह आंदोलन अपने मुकाम पर पहुंच कर रहेगा और इसी संकल्प के साथ आंदोलन शुरू हुआ था कि मुद्दों को हल कर करके ही दम लेंगे।"

    Farmers occupied both the gates of Greater Noida authority during protest

    ये हैं किसानों की मांग
    आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की स्थापना के साथ ही किसानों का विरोध शुरू हो गया था। यहां के किसान खुद को इस विकास से दूर मानते आए हैं। पिछले एक दशक के दौरान 64.7% अतिरिक्त मुआवजा, 6%, 7% और 10% आबादी भूखंडों से जुड़े मामले लटके हुए हैं। इसके अलावा आबादी निस्तारण, बैकलीज मामले, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल रेलवे कॉरिडोर से प्रभावित किसानों की मांग खत्म नहीं हो रही हैं। लगातार किसान आंदोलन चल रहे हैं।

    पिछले करीब एक वर्ष से डीएमआईसीडीसी से प्रभावित किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ महीनों से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों का आंदोलन चल रहा था, लेकिन योगी आदित्यनाथ के आने से पहले किसानों को आश्वासन देकर उठा दिया गया। अब मांगें और शर्त पूरी नहीं होने पर दोबारा 18 जुलाई से किसान धरने पर बैठ गए हैं। खास बात यह है कि अबकी बार इस किसान आंदोलन का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है।

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