माओवादी 'आप' आंदोलन में शामिल हों: प्रशांत भूषण

गौर हो कि प्रशांत भूषण ने अभी कश्मीर में सेना तैनाती को लेकर भी विवादास्पद बयान दिया था उन्होने कहा था कि घाटी में सेना तैनाती मुद्दे पर जनता की राय लेनी चाहिए जिस पर विवाद खड़ा हो गया था। भूषण ने फिर तर्क दिया कि किसी भी राज्य में सेना तीन कारणों से ही तैनात होनी चाहिए। पहला- जब राज्य में सीमावर्ती क्षेत्रों से घुसपैठ की संभावना हो, दूसरा- जब दंगों के हालात हो और तीसरा जब आम जनता की सुरक्षा पर खतरा हो तब वहां की जनता से राय लेकर क्षेत्र में सेना तैनात की जानी चाहिए।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेना की तैनाती भी तीसरी श्रेणी में ही आती है। इन क्षेत्रों में पहले जनता की राय ली जाय तब वहां सेना लगाई जाए क्योंकि इससे कार्पोरेट घरानों को लाभ होता है, आम लोगों को नहीं। कश्मीर से सेना हटाने वाले बयान पर प्रशांत की आलोचना की गई थी, जिसके बाद उन्होने कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की गई।
प्रशांत ने कश्मीर पर 2011 में यह भी बयान दिया था कि कश्मीर भारत में रहे या नहीं इसके लिए इस पर वहां के लोगों का मत जानना आवश्यक है, हालांकि उनके बयान से 'आप' ने किनारा कर लिया था।












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