क्या है Traumatic Asphyxia? नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की भगदड़ में इसकी वजह से गईं 5 जाने

Railway Station Stampede: शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। महाकुंभ तीर्थयात्रियों से भरे इस भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर भगदड़ मच गई, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। इस भयावह हादसे में पांच लोगों की मौत की वजह 'ट्रॉमैटिक एस्फिक्सिया' (Traumatic Asphyxia) यानी दम घुटना बताया गया है।

RML अस्पताल के PRO डॉ. पुलिन गुप्ता ने पुष्टि की कि अस्पताल में कुल 5 शवों का पोस्टमार्टम किया गया। मृतकों में एक 25 वर्षीय युवक और चार महिलाएं शामिल हैं। यह मौतें 'ट्रॉमैटिक एस्फिक्सिया' के कारण हुईं, जो अत्यधिक दबाव के चलते सांस लेने में बाधा उत्पन्न होने से होती है।

Stampede

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायलों को LNJP अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात की गई है।

Traumatic Asphyxia: क्या होता है ट्रॉमैटिक एस्फिक्सिया?

ट्रॉमैटिक एस्फिक्सिया एक ऐसी घातक स्थिति होती है, जिसमें सीने या ऊपरी पेट पर अत्यधिक दबाव पड़ने से सांस लेने और रक्त संचार में रुकावट आ जाती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई व्यक्ति किसी भारी वस्तु के नीचे दब जाता है, वाहन दुर्घटना में फंस जाता है या भगदड़ में भीड़ के बीच कुचल जाता है। अगर समय रहते इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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Railway Station Stampede: कैसे हुआ हादसा?

शनिवार रात (15 फरवरी) करीब 9:55 बजे हजारों तीर्थयात्री प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में सवार होने के लिए स्टेशन पहुंचे। प्लेटफॉर्म 12, 13 और 14 पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा थी। इसी बीच, अचानक प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा हुई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। घबराए यात्रियों ने प्लेटफॉर्म 16 की ओर दौड़ लगा दी, जहां एक एस्केलेटर पर भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई।

इस भगदड़ में कई यात्री जमीन पर गिर पड़े और भीड़ ने उन्हें रौंद दिया। दम घुटने से कई लोगों की हालत बिगड़ गई। कुछ यात्रियों ने मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन अफरा-तफरी के माहौल में कोई उनकी पुकार नहीं सुन सका। इस दिल दहला देने वाले मंजर में जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनके लिए यह क्षण जीवनभर का दर्द बन गया।

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LNJP अस्पताल में घायलों का इलाज जारी

LNJP अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, भगदड़ में घायल हुए लोगों में से कुछ को गंभीर फ्रैक्चर हुए हैं, जबकि कुछ यात्रियों के निचले अंगों में गंभीर चोटें आई हैं। 15 डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार घायलों के इलाज में जुटी हुई है। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

परिजनों की चीख-पुकार, ग़म और मातम का माहौल

इस हादसे के बाद रेलवे स्टेशन और अस्पतालों में परिजनों की चीख-पुकार सुनाई दी। कई लोग अपने परिजनों की तलाश में इधर-उधर भागते नजर आए। अस्पताल में अपने प्रियजनों के शव देखकर लोग बिलख उठे। इस हादसे ने न केवल मृतकों के परिवारों को दर्द दिया, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया।

हादसे के बाद उठे सुरक्षा सवाल

रेलवे प्रशासन पर भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह उठता है कि जब पहले से भारी भीड़ थी, तो अचानक प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा क्यों की गई? रेलवे प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रण के लिए पहले से उचित इंतजाम करने चाहिए थे।

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यह हादसा एक सबक है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अपनों को खो चुके परिवारों के लिए यह दर्द कभी नहीं मिटेगा, लेकिन इस हादसे से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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