समर वेकेशन में कठपुतली बनाना सीख रहे बच्चे

Puppet
नई दिल्ली। नई पीढ़ी को मानव शरीर और उसकी गतिशीलता को प्रत्यक्ष रूप से महसूस कराने के लिए, राष्ट्रीय संग्रहालय ने ऐतिहासिक प्रदर्शनी ‘‘रूप-प्रतिरूप'' के आयोजन के दरम्यान इस सप्ताहांत बच्चों के लिए कठपुतली कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला के कारण संग्रहालय देखने आने वाले दर्षकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

कठपुतली कार्यशाला में भाग लेने वाले 8-15 साल के लड़के - लड़कियों ने नृत्य करती हुए कठपुतलियों को निकट से देखा और इन कठपुतलियों पर अपने हाथ आजमाने की कोश‍िश की। इस कार्यशाला में भाग लेने वाले लड़के-लड़कियों में भारी उत्साह देखा गया। इस दो दिवसीय श‍िविर को विषेशज्ञों ने निर्देषित किया। यह कार्यशाला रविवार की शाम कठपुतली प्रदर्शन के साथ समाप्त हो गयी।

राष्ट्रीय संग्रहालय ने हाल ही में स्वयंसेवकों को निर्देषित करने के लिए ‘युवा साथी' नामक एक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करने वाले 40 छात्रों के लिए एक दीक्षांत समारोह आयोजित किया था। इस कार्यशाला ने इन छात्रों के लिये सीखने और मनबहलाव के अलावा अद्वितीय अनुभव लेने का मौका प्रदान किया।

डॉ. वेणु वासुदेवन ने तीन महीने के पाठ्यक्रम के दूसरे बैच के विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया। उन्होंने कहा कि संग्रहालय जल्द ही कॉलेज के छात्रों को परम्परागत प्रशिक्षण देने के लिए इस तरह के और भी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी योजना स्वयंसेवक गाइडों (स्कूल समूहों का मार्गदर्शन करने के लिए) की संख्या को बढ़ाकर 200 करना है।''

कठपुतली कार्यशाला के रूप में, प्रख्यात कठपुतली विषेशज्ञ और राजधानी में कार्य कर रहे 1998 में शुरू किये गये कटकथा की थिएटर विषेशज्ञ अनुरूपा राॅय ने 25 बच्चों का नेतृत्व किया। इस प्रदर्शनी का विशय ‘भारतीय कला में काया' के साथ समन्वय स्थापित करते हुए ‘मानव देह की तलाष' पर आधारित था। 7 जून को समाप्त होने वाले इस ग्यारह सप्ताह की प्रदर्षनी को क्यूरेट करने वाले कला इतिहासकार नमन पी. आहूजा ने राश्ट्रीय संग्रहालय की आठ गैलरी में आयोजित इस प्रदर्शनी में एक प्रमुख विषय ‘रैप्चर (उत्सव)' पर शनिवार शाम को एक व्याख्यान दिया।

कठपुतली कार्यशाला के प्रतिभागियों को शुरू में प्रदर्षनी का दौरा कराया गया, उसके बाद उन्होंने कई कला अभ्यास किया। उसके बाद, उन्होंने पांच इंद्रियों और मानव शरीर की गतिविधियों के तरीकों पर आधारित थिएटर गेम्स में हिस्सा लिया।

सत्र के दौरान बच्चों को कागज और टेप का इस्तेमाल कर सामान्य बुनराकु कठपुतलियां बनाने का प्रश‍िक्षण दिया गया। बच्चों को उन्हे निर्देषित करने के लिए तकनीकों के बारे में जानकारी दी गयी, साथ ही उन्हे शरीर की गतिविधियों के पीछे का विज्ञान और मानव शरीर के निर्माण के बारे में जानकारी दी गयी।

कार्यशाला का समापन रॉय और कठपुतली कलाकारों की उनकी टीम के द्वारा ‘राम के बारे में (अबाउट राम)' शीर्षक वाले एक नाटक पर एक छोटी सी प्रस्तुति के साथ हुआ। शो के दौरान हनुमान और राम की कठपुतली को पश्चिम बंगाल के छाऊ नृत्य को पेष करते हुए दिखाया गया।

रॉय ने राष्ट्रीय संग्रहालय के कला को समझने के बहु - अनुशासनात्मक दृष्टिकोण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कठपुतली को बेहतर ढंग से जानने के लिए नृत्य और संगीत के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय संग्रहालय में परफार्मिंग और फाइन आर्ट्स का एक दूसरे का पूरक होना अद्भुत है।''

डॉ. वेणु ने कहा कि यहां चल रही प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में संग्रहालय इस माह के अंत में वयस्कों के लिए एक इसी तरह की कठपुतली प्रर्दषनी और मूकाभिनय कार्यशाला का आयोजन करेगा।

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