होनहार खिलाड़ी का सड़क पर बहता रहा खून, तमाशबीन बनें रहें लोग
नयी दिल्ली। वो सड़क पर पड़ी रही, खून से लथपथ उसका शरीर मदद की गुहार लगाता रहा। शरीर शिथिल था, लेकिन उसकी आत्मा मदद मांग रही थी। वो देश की भविष्य थी, लेकिन असहाय। दिप्ती मदद की आस लगाए सड़क पर तड़प-तड़प कर मर गई, लेकिन दिलवालों की दिल्ली में कोई ऐसा नहीं था जो उसकी मदद को सामने आ पाता। तमाशबीन बनें लोग देखते रहे और तड़प-तड़प कर उसकी जान सड़क पर ही निकक गई। दो दिन पर दिल्ली की सड़क पर कब्ड्डी की खिलाड़ी दिप्ती यश को एक तेज रफ्तार कुचल कर निकल गई। वो सड़क पर ही तरपती रही, लेकिन उसे रौंदने वाली कार के चालक ने उसे बचाने की कोशिश तक नहीं की। जब तक पुलिस आती तब तक इस खिलाड़ी का इतना खून बह चुका था कि अस्पताल में डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

दिप्ती कार की शिकार बन गई अब सिर्फ दीप्ति की यादें बची हैं। कबड्डी में जीते गए दिप्ती के मेडल बचे हैं। वो खत बचा है जो मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी ने दीप्ति को होनहार छात्रा होने की तारीफ में लिखा था। घटना सोमवार दोपहर 2 बजे की है। दीप्ति दिल्ली के सिरी फोर्ट के पास स्थिति कमला नेहरू कॉलेज से निकलकर सड़क पार कर रही थी, लेकिन एक तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी।
हादसे के बाद दीप्ति शायद जिंदा रहती अगर उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाता, लेकिन उसे टक्कर मारने वाली कार की महिला ड्राइवर ने ऐसा कुछ नहीं किया। पुलिस के मुताबिक हादसे के वक्त वहां से गुजर रहे एक कंप्यूटर इंजीनियर ने फौरन पुलिस को इस बात की जानकारी दी। उसने उस कार की भी जानकारी और उसका नबंर पुलिस को दिया जिसने दिप्ती को टक्कर मारी थी। पुलिस ने नंबर के आधार पर इस महिला को गिरफ्तार भी किया लेकिन उसे थाने से ही जमानत मिल गई।
दीप्ति महरौली के सुल्तानपुरी कालोनी में रहती थी। उसने कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर 40 से अधिक मेडल और सर्टिफिकेट हासिल किए थे। पढ़ने में भी वो बेहद होनहार थी। परिवार के मुताबिक वो शुरु से ही टॉपर रही, इस साल जियोग्राफी में उसने पूरे देश में टॉप किया था, जिसकी वजह से उसे मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में उसे तारीफ की एक चिट्ठी भी लिखी थी। क्या आप जानते हैं- सिर्फ दिल्ली में ही 2013 में 1725 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है।












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