दिल्ली ने कभी नहीं हुआ इतना महंगा चुनाव प्रचार
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। इससे पहले शायद ही दिल्ली वालों ने कभी इतना महंगा चुनाव प्रचार देखा हो। जिस तरह से अखबारों, टीवी चैनलों और एफएम रेडियों पर सभी दलों ने अपनी कैंपन चलाई उससे साफ है कि करोड़ों रुपये फूंके गए कैंपेन में।
पार्टियों ने किया मोटा खर्च
वरिष्ठ चिंतक और कथाकार प्रताप सहगल कहते हैं कि प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की रैलियों और विज्ञापनों से पता चलता है कि यह चुनाव उनके लिए नाक का सवाल बन गया है। उम्मीदवारों ने ज्यादा खर्च नहीं किया बल्कि पार्टियां अपने स्तर पर भारी खर्च कर रही हैं। चुनावों में उम्मीदवारों के स्तर पर होने वाले खर्च की तो सीमा तय की गई है लेकिन पार्टियों के लिए खर्च की कोई सीमा नहीं है।
कैंपेन फिर भी जारी
बहरहाल आज उम्मीदवारों और उनके समर्थक सुबह पार्कों में घूम रहे लोगों से संपर्क करते दिखे। सीलमपुर मेंकांग्रेस के उम्मीदवार मतीन अहमद अपने इलाके में लोगों से मिल जुल रहे थे। इसी तरह से नई दिल्ली सीट पर भाजपा के कई समर्थक पार्कों में लोगों को नुपूर शर्मा को वोट देने का आग्रह कर रहे थे।
200 करोड़ खर्च
वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने कैंपेन में हुए खर्च के बारे में कहा है कि दिल्ली विधानसभा के लिए हुए अलग-अलग पार्टियों के चुनाव प्रचार पर 150 से 200 करोड़ रुपये तक खर्च किए। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों के प्रचार में हुए खर्च के मुकाबले इसे 30 से 40 फीसदी तक ज्यादा बताया जा रहा है।
थोक कॉल भी
प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ-साथ रैलियों और घर-घर पर्चे बांटने, मोबाइल संदेश और थोक कॉल करने पर भी काफी खर्च हुआ है।अगर एसोचैम के दावे को माने तो उम्मीदवारों की बजाय राजनीतिक दलों ने आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन देने में भारी खर्च किया है।













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