केंद्र सरकार की फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, व्यापक आंदोलन की तैयारी में केसीआर और टिकैत
किसान आंदोलन खत्म होने के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ़ फिर से व्यापक आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2022। किसान आंदोलन खत्म होने के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ़ फिर से व्यापक आंदोलन की तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने राज्य से आए सैकड़ों आंदोलनरत किसानों को संबोधित किया। तेलंगाना भवन पर सोमवार को आयोजित धरना-प्रदर्शन के मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व फूड सिविल सप्लाई मंत्री पीयूष गोयल से अपील की कि जैसे वह सारी जगहों से धान खरीदते हैं, उसी तरह तेलंगाना का धान भी खरीदें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के फ़ैसले का 24 घंटे इंतजार करेंगे। 24 घंटे बाद अगर सही फैसला नहीं लिया गया तो तेलंगाना के किसानों को उनका हक दिलवाने के लिए आंदोलन करेंगे।

कृषि नीति की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि पूरे देश के किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए हम कमज़ोर नहीं हैं। इस मौके पर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के जिस कोने में भी किसानों की समस्या को लेकर कोई आवाज उठाएगा, भाकियू और एसकेएम उसका पुरजोर समर्थन करेगा। साथ ही देश के किसानों को एकजुट कर एक देश एक कृषि नीति की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन चलाएगा। वहीं मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा कि तेलंगाना राज्य के सभी मंत्रिगण, सांसद, विधायकगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। तेलंगाना के किसान करीब दो हजार किलोमीटर दूर चलकर दिल्ली पहुंचे। सभी विधायक और किसान इतनी कड़ी धूप में क्यों आए, उनकी क्या मजबूरी थी। क्या धान उगाना पाप था? नरेन्द्र मोदी आप किसानों के साथ अन्याय न करें।

KCR ने पीयूष गोयल पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि भारत में जहां भी कष्ट पाकर किसानों की आह निकले, वहां की सरकार जरूर सत्ता से बाहर निकलेगी। कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती। आपके फूड सिविल सप्लाई मंत्री पीयूष गोयल का बर्ताव बहुत ही अपमानजनक था। हमारे कृषि मंत्री निरंजन रेड्डी जब तेलंगाना के किसानों की मांग को लेकर पीयूष गोयल के पास पहुंचे तो उनका व्यवहार बुरा और अपमानजनक था। पीयूष गोयल ने कहा कि आप तेलंगाना की जनता को किनकी (टूटा हुआ चावल) खाने की आदत डालें। यह व्यवहार उचित नहीं है। यह पीयूष गोयल नहीं, पीयूष गोलमाल है। उन्हें देश के कोने-कोने के बारे में क्या मालूम है, यह मुझे समझ में नहीं आता। तेलंगाना में 20 लाख बोरवैल चलते हैं, करोड़ों का खर्च कर किसानों ने मोटर खरीदी और धान उगाने का काम किया।
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किसानों का महासंग्राम शुरू होगा- केसीआर
तेलंगाना बनने के पूर्व पानी का स्तर जमीन से हजार मीटर नीचे था। महबूब नगर के लाखों लोग कामकाज की तलाश में अन्य राज्यों को चले गए थे, लेकिन तेलंगाना राज्य बनने के बाद स्थिति में भारी परिवर्तन आया है। किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने वाला एकमात्र राज्य तेलंगाना है। तेलंगाना में कृषि भूमि में एक करोड़ एकड़ की बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री जी आपके मंत्री उल्टा मेरा अपमान भी कर रहे हैं। क्या धान उगाना ही किसानों का दोष है। केसीआर ने कहा कि किसानों का महासंग्राम शुरू होगा। इस देश के किसान भिखारी नहीं हैं। तेलंगाना के किसानों की मांग है कि आप एग्रीकल्चर पॉलिसी बनाइए। हम भी इसमें अपना योगदान देंगे। अगर ऐसा नहीं हो सका तो तेलंगाना जब लड़ने निकलता है तो अंतिम विजय प्राप्त करने तक रुकता नहीं है।

'देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनेगी'
केसीआर ने कहा कि तेलंगाना सरकार कमज़ोर नहीं है। वह अपने किसानों को बचा लेगी, लेकिन हम चाहते हैं कि सारे देश को पता चले कि इनका व्यवहार क्या है। क्या केन्द्र सरकार के पास धान खरीदने का धन नहीं या नरेन्द्र मोदी का मन नहीं। यह षड्यंत्र देश में आगे नहीं चलेगा। केसीआर ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को कॉरपोरेट के वश में करना चाहती है। यही इनकी नीति है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों के हक में केन्द्र सही फैसले नहीं लेता है और सही एग्रीकल्चर पॉलिसी नहीं बनती है तो देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनेगी। इसमें वे अन्य विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत करेंगे।

'केंद्र सरकार ने किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया'
तेलंगाना की मौजूदा एमएलसी और पूर्व सांसद के. कविथा ने कहा कि जब तक तेलंगाना के किसानों से उसकी फसल के एक-एक दाने की खरीद नहीं होगी तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे। हमारा सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके पर राकेश टिकैत ने कहा कि एक राज्य का मुख्यमंत्री पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली में धरना दे और वह भी फसल खरीद के लिए, इससे शर्मनाक बात केंद्र सरकार के लिए और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में चारों ओर किसान धरने पर बैठे तब भी केंद्र सरकार ने किसानों से सौतेला व्यवहार किया। उन्हें खालिस्तानी, पाकिस्तानी, गुंडा-मवाली न जाने क्या क्या कहा। हमें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई। किसानों ने हक मांगा तो उन पर मुकदमे लाद दिए गए। लेकिन हम झुके नहीं और तीन बिल वापसी के बाद ही किसान घर को लौटे।

केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हाथ का खिलौना बनी हुई- टिकैत
राकेश टिकैत ने कहा कि एक तरफ संसद में कहा जाता है कि कृषि प्रदेश का मामला है और एमएसपी केंद्र सरकार तय करती है। राज्यों का कोटा वह र्धारित करती है। तीन काले कृषि कानून भी संसद में लाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हाथ का खिलौना बनी हुई है। लेकिन ये देश का किसान जाग चुका है। उन्होंने कहा कि तेरह महीने दिल्ली में चले किसान आंदोलन का ही नतीजा है कि आज एक राज्य किसानों की मांग को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठा है। इसके अलावा भी कोई राज्य किसानों के मुद्दे उठाएगा तो वह हर उस मंच पर जाकर किसानों की आवाज उठाएंगे। केन्द्र सरकार की संभावित बिजली नीति के तहत अगर किसानों के पास कई पशु हों तो कॉमर्शियल मीटर लगाना पड़ेगा। क्या इसी नीति से किसानों का भला होगा। उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो देश में बड़ा किसान आंदोलन होगा।
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