जब DU की छात्रा ने मार्क जुकरबर्ग से पूछा पीरियड्स पर सवाल
नयी दिल्ली। सोशल मीडिया का पर्याय बन चुका फेसबुक आए दिन अपने में नए फीचर जोड़ रहा है। फेसबुक के माध्यम से जागरुकता फैलाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। लेकिन जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से एक सवाल पूछा तो वो हक्के-बक्के रह गए। आखिर क्यों एक मर्द को पहननी पड़ी सैनेटरी पैड?

दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने वाली एक 20 साल की छात्रा आरुषि ने चिट्ठी के जरिए मार्क जुकरबर्ग से आग्रह किया है। आरुषि ने जुकरबर्ग से आग्रह किया है कि वो फेसबुक में एक नया बटन जोड़े जिसकी मदद से वह महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म के लिए लोगों में जागरुकता फैला सके। फीमेल कर्मचारियों के लिए अनोखी पहल, मिलती है पीरियड्स लीव
आरुषि ने गुजारिश की है कि फेसबुक में ऐसे बटन का इजाज करें जिसकी मदद से पीरियड्स के वक्त सभी वर्जित चीजों के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जा सके। आरुषि ने जुकरबर्ग से गुजारिश की है कि वो फेसबुक पर 'On My Period' बटन को जोड़कर लोगों को जागरुक करे कि मासिक धर्म के वक्त महिला को वर्जित न समझा जाए। आपको बता दें कि आरुषि दुआ पिछले कई महीनों से मासिक धर्म पर वर्जित चीजों को प्रति लोगों को जागरुक करने का काम कर रही है और अब वो मार्क जुकरबर्ग से सहयोग मांग रही है। OMG मर्दों को भी होती है 'माहवारी', नये शोध में खुलासा
आपको बता दें कि भारतीय समाज में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपवित्र समझा जाता है। उन्हें हीन भावना से देखा जाता है। उन्हें कई ऐसे काम है जिन्हें करने से रोक दिया जाता है। ये आलम सिर्फ गांवों का ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े शहरों में भी मासिक धर्म को लेकर कई अंधविश्वास है जो लोग सालों-साल से निभा रहे हैं। स्लाइड के जरिए देखिए मासिक धर्म के दौरान महिलाओं पर कैसे लग जाती है पाबंदी?

अधूत बन जाती है महिलाएं
भारतीय समाज में मासिक धर्म से गुजर रही महिलाओं को अपवित्र समझा जाता है। उन्हें धर्म-आध्यात्म के कामों से दूर रखा जाता है। मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी लग जाती है।

पीरियड्स पर शर्म क्यों?
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को कई मान्यताओं से गुजरना पड़ता है। पीरियड्स के दौरान उन्हें रसोई घर में एंट्री नहीं मिलती। माना जाता है कि अगर वो इस दौरान किचन में प्रवेस करेंगी तो घर का सबसे अहम हिस्सा अपवित्र हो जाएगा।

जागरुकता की है जरुरत
भारत में कई स्थानों पर मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पुरुष के पास भी नहीं सोने दिया जाता।मासिक धर्म की अवधि के दौरान उन्हें परिवार के पुरूषों से दूर रहना है, जिसमें उन्हें पानी और भोजन परोसने से लेकर उनके कपड़ों और रोजमर्रा की चीजों को छूना मना किया जाता है।

कब खत्म होगी ये मान्याएं?
प्राचीन समय में स्त्रियों के मासिक धर्म के दौरान उन्हें अपने घर से दूर अलग किसी झोपड़ी में रहने के नियम कायम थे। आज भी कई घरों में लड़कियों के बिस्तर और उनकी जरूरत की चीजों को घर के किसी एक कोने में रखा जाता है, जिससे वे पूरे घर को ‘अपवित्र' करने से बची रहें।

क्यों लगाई जाती है पाबंदी
मासिक धर्म के दौरान महिलाएं ना तो खाना खुद से बना सकती है और ना ही खुद से निकालकर खा सकती है। उन्हें घर के पूजा घर में भी प्रवेश नहीं दिया जाता।












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