दिल्ली चुनाव में 'आप' की 'आप' से टक्कर
नयी दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां बाकी पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने में जुटी हुई हैं। पिछले चार दिनों में भाजपा ने अपने साथ दूसरी पार्टियों के चार बड़े नेताओं को अपने साथ जोड़ा हैं। जिसमें पूर्व आईपीएस अधिकारी और अन्ना आंदोलन की समर्थक किरण बेदी, आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता शाजिया इल्मी, आप से निष्कासित नेता विनोद कुमार बिन्नी और कांग्रेस की नेता कृष्णा तीरथ शामिल हैं।

चुनाव से चंद दिनों पहले भाजपा ने 'आप' की टिकट पर विधानसभा चुनाव और लोकसभा हार चुकी शाजिया को अपने साथ कर दिया। वहीं 'आप' से निष्कासित नेता विनोद बिन्नी भी बड़े नेता के तौर पर नहीं जाने जाते हैं। अन्ना आंदोलन की समर्थक किरण बेदी के पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं हैं। ऐसे में भाजपा में शामिल हुए ये नेता दिल्ली में कमल खिलाने नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की पोल खोलने आए हैं।
जिस रफ्तार से दिल्ली भाजपा में बाहरी लोगों का समावेश हो रहा हैं उससे लगने लगा है कि भाजपा यहां खुद को कमजोर महसूस कर रही हैं। तभी उसे पैराशूट उम्मीदवारों के सहारे की जरुरत पड़ी है। भले भाजपा इस बात को स्वीकार न करें, लेकिन ये साफ तौर पर दिख रहा है कि भाजपा को आम आदमी पार्टी की रफ्तार को रोकने के लिए इन लोगों के सहारे की जरुरत महसूस हुई है।
भाजपा में आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्यों का समावेश इशारा कर रहा है कि दिल्ली का चुनाव अब भाजपा और आप के बीच नहीं ब्लकि आप का आप से मुकाबला हो गया है। दरअसल भाजपा के सामने आप ने मुश्किलें खड़ी कर दी थी। महीनों से चुनाव की तैयारियों में जुटे 'आप' कार्यकर्ताओं ने भाजपा के सामने 49 दिन में मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मुद्दा ही नहीं छोड़ा। ऐसे में आप को घेरने के लिए भाजपा को प्लान बी तैयार करनी पड़ा।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जान गए हैं कि बूथ लेवल की राजनीतिक का जो फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में काम कर गया वो दिल्ली में आम आदमी पार्टी को घेरने के लिए पर्याप्त नहीं है। इतना ही नहीं अमित शाह इस बात को भी भांप चुके हैं कि मोदी लहर का इफेक्ट भी सत्ता विरोधी मूड के साथ ही काम करता है, लेकिन दिल्ली बिना सरकार के हैं। ऐसे में सिर्प मोदी फेस के साथ दिल्ली में कमल खिलाना आसान नहीं होगा।
भाजपा को एक ऐसा निर्विवादित चेहरे की तलाश थी जो यहां पार्टी को पोस्टर फेस भी बनें और आप पर ताबड़तोड़ हमले भी करें। ऐसे में अरविंद केजरीवाल की पूर्व सहयोगी किरण बेदी से बेहतर उम्मीदवार भाजपा के सामने और कोई नहीं था। किरण बेदी को भले ही आधिकारिक तौर पर सीएम उम्मीदवार न बनाया गया हो, लेकिन उनका रुतबा सीएम कैंडिडेट से कम नहीं हैं। ऐसे में एक बात तो तय है कि इस बार भाजपा पैराशूट उम्मीदवारों से साथ आप से टकराएंगी।












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