Narsinghpur News: दुर्गोत्सव पर 51 लाख के नोटों से सजाई गई माता की भव्य झांकी

नरसिंहपुर जिले के रिपटापार में इस वर्ष दुर्गोत्सव का आयोजन एक अनोखी भव्यता के साथ किया गया है। जय हनुमान दुर्गा मंडल द्वारा स्थापित माता की प्रतिमा की झांकी को 51 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया है, जो भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

इस सजावट में 20 रुपए से लेकर 500 रुपए तक के नोटों का प्रयोग किया गया है, जिससे इस झांकी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

Grand tableau of Mata decorated with 51 lakh rupee notes on Durga festival

भव्य सजावट की विशेषताएं

मंडल के सदस्यों का कहना है कि इस साल की झांकी पिछले सभी वर्षों की तुलना में अधिक भव्य और आकर्षक है। यह सजावट न केवल जिले में, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। सिंहपुर चौराहे से गुजरने वाली सड़क पर, ओवरब्रिज के नीचे मंडल ने एक भव्य पंडाल का निर्माण किया है। यहां श्रद्धालु माता-रानी के दर्शन कर सकते हैं, और यह स्थान श्रद्धालुओं से भरा हुआ है।

सुरक्षा के विशेष इंतजाम

51 लाख के नोटों की सजावट के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे पंडाल क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। मंडल के 40 सदस्य सुरक्षा के लिए हर समय पंडाल में तैनात रहेंगे, जबकि प्रमुख स्थानों पर विशेष सदस्य और माता रानी के सेवक भी उपस्थित रहेंगे।

भक्तों को लगभग 20 फीट की दूरी से दर्शन की अनुमति दी गई है, ताकि सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके। इस विशेष व्यवस्था के चलते पूरे शहर में दुर्गोत्सव को लेकर एक विशेष उत्साह का माहौल है। मंडल का मानना है कि इस वर्ष की झांकी से शहर का नाम और भी ऊंचा होगा, और यह आयोजन स्थानीय समुदाय के लिए गर्व का विषय बना है।

सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक

इस भव्य आयोजन ने स्थानीय समाज को एकजुट किया है, जहां लोग अपनी आस्था और भक्ति के साथ एकत्रित हो रहे हैं। माता की इस भव्य झांकी को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आ रहे हैं, और सभी के चेहरों पर खुशी और उत्साह झलक रहा है।

नवरात्रि का उत्सव

दुर्गोत्सव के इस मौके पर, भक्तों के बीच भक्ति गीत गाए जा रहे हैं और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी सशक्त करता है। इस प्रकार, नरसिंहपुर के रिपटापार में आयोजित यह दुर्गोत्सव न केवल माता दुर्गा की आराधना का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखने का एक प्रयास है। मंडल के सदस्यों की मेहनत और श्रद्धालुओं की भक्ति ने इस आयोजन को एक नया आयाम दिया है।

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