शिवसेना तो वैसे भी ले डूब सकती है भाजपा को!
मुंबई। शिवसेना जिस अति उत्साहपन में भाजपा से अलग होने संकेत दे रही है उससे भाजपा को नहीं बल्कि शिवसेना को ही नुकसान भोगना पड़ सकता है। क्योंकि यह सर्वज्ञात है कि शिवसेना का उग्र रूप आजतक सीधे और भोले रोज मर्रा के काम में उलझे हुए मतदाता को कभी लुभा नहीं सका ।

शायद यही वजह भी रही कि वर्ष 1999 से लगातार कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज हो रही है।
इससे भी पड़ा शिवसेना की छवि पर असर
वर्ष 2005 में फूट औऱ अंदरूनी कलह ने शिवसेना की और भी गत बिगाड़ दी। यह फूट नव निर्माण सेना के रूप में सामने आई। जब राज ठाकरे ने अपनी पार्टी अलग बना ली। जब दोनो अलग हुए तो सीधा असर शिवसेना बची कुची ताकत पड़ा। अब भी वह उग्र रूप दोनो पार्टी शिवसेना व महाराष्ट्र नव निर्माण सेना में दिखता है।
घातक होगा भाजपा के लिए
दरअसल, शिवसेना भाजपा के साथ रहेगी तब भी भाजपा को ही नुकसान है और भाजपा के साथ गठबंधन में नहीं रहेगी तब भी भाजपा को ही नुकसान है। क्योंकि शिवसेना की इस तरह की छवि से भाजपा को गहरा झटका यह लग सकता है। यह झटका वोट के बिखराव के रूप हो सकता है औऱ एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की जीत के रूप में उभर सकता है।












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