किसकी सरकार, किसको फायदा, किसका नुकसान
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ही इतना विवाद हो गया है तो चुुनाव के नतीजों के बाद क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा अभी लगाना मुश्किल है लेकिन पिछले बयानों और राजनीतिक दृष्टि से यह विश्लेषण किया जा सकता है कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार या किस पार्टी का मुख्यमंत्री होने पर क्या फायदा और क्या नुकसान होे सकता है।
चलिए मान लीजिए अगर शिवसेना का मुख्यमंत्री बना तो, भाजपा का मुख्यमंत्री बना तो क्या होगा, कांग्रेस का या एनसीपी पार्टी से मुख्यमंत्री हुआ तो क्या होगा। सीधा सवाल यह उभर रहा है कि किसकी सरकार, किसको फायदा, किसका नुकसान? इसी का जवाब तलाशते हुए पढ़िएः

क्या फायदा-क्या नुकसान
मराठा समुदाय के लिए हमेशा से ही शिवसेना का स्वभाव नर्म रहा है। शिवसेना के बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे तक मराठी भाषी लोगों के विकास के बारे में सबसे ज्यादा बोला और कहा जाता रहा है।
किसको नुकसान- इससे महाराष्ट्र में उत्तर भारत से रोजगार की तलाश में आने वाले बेरोजगार युवक व लोगों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। शिवसेना के पिछले बयानों के आधार पर कहा जा सकता है कि गैर मराठी भाषी लोगों से भेदभाव बढ़ सकता है।

किसको नुकसान-किसको फायदा
भाजपा की सरकार हुई औऱ मुख्यमंत्री भी भाजपा का हुआ तो पिछले बयानों और भाजपा का आरएसएस और हिंदुत्व आधार से कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भेदभाव बढ़ जाए। वहीं धार्म को आधार बनाकर हिंसा करने वाली हिंदुत्व ताकतें ज्यादा मजबूत हो सकती हैं।

किसको, फायदा, नुकसान
महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस की पंद्रह सालों से गठबंधन की सरकार है। इस दौरान घोटाले हुए हैं। खुलकर जांच नहीं हुई। आदर्श हाउसिंग सोसायटी का घोटाला कांग्रेस सरकार में महाराष्ट्र में हुआ घोटाला है। वहीं इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से जारी की गई उम्मीदवारों की लिस्ट पर नजर डालें तो परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया है। यूपीए सरकार में मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे की बेटी को टिकट, विलासराव देशमुख के बेटे को टिकट दे दिया गया है।
लोकसभा चुनाव में वित्तमंत्री पी. चितंबरम को भी टिकट दिया गया था। हालांकि भाजपा की काफी हद तक परिवारवाद की ओर कदम बढ़ाती है लेकिन भाजपा का यह कदम कांग्रेस से थोड़ा कमतर आंका जा सकता है।

एनसीपी की सरकार तो क्या होगा नुकसान
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकार बनी और मुख्यमंत्री भी एनसीपी का ही हुआ तो युवा वर्ग को झटका लग सकता है। एनसीपी की ओर से युवा वर्ग को अभी तक कोई खास पहल करते हुए नहीं देखा गया। फायदा तो सिर्फ यहां राजनीतिक हित में हो सकता है क्योंकि एनसीपी को अभी राजनीतिक मैदान में राष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध करने की जरूरत है।












Click it and Unblock the Notifications