यूपी, पंजाब चुनावों में हार के डर से कानून वापस लिए गए, सालभर से क्यों नहीं दिखी किसानों की परेशानी- शरद पवार
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को कृषि कानूनों के निरस्तीकरण पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पंजाब, यूपी के चुनावों में हार के डर से सरकार ने यह फैसला लिया है।
मुंबई, 19 नवंबर। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को कृषि कानूनों के निरस्तीकरण पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में हार के डर से तीनों कृषि कानूनों को वापस करने का फैसला किया है। वहीं उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों की सराहना करते हुए कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ उनके साल भर के संघर्ष को भुलाया नहीं जाएगा।

सरकार ने बिना चर्चा के ही पास कर दिए थे कानून
उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने बिना किसी चर्चा के और राज्यों को विश्वास में लिए बगैर ही जल्दबाजी में इन कानूनों को पारित कर दिया था। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में पत्रकारों से बात करते हुए पवार ने कहा, 'जब मैं 10 साल तक कृषि मंत्री था, तब भाजपा द्वारा संसद में कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया गया था, जो उस समय विपक्ष में थी। मैंने वादा किया था कि कृषि एक राज्य का विषय है और इसलिए हम राज्यों को विश्वास में लिए बिना या चर्चा के बिना कोई निर्णय नहीं लेना चाहेंगे।' उन्होंने कहा कि इसके बाद मैंने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ दो दिन बैठक की और उनके सुझाव लिए। इसके अलावा मैंने विश्वविद्यालयों और किसान संगठनों से भी राय ली। हम कृषि कानूनों पर चर्चा शुरू करने की तैयारी कर चुके थे, लेकिन सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया और भाजपा सत्ता में आई।
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चुनावों के नजदीक आते ही कानून वापस ले लिये
उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर जब ये कानून लाई तो तमाम विपक्षी दलों ने इनका विरोध किया, लेकिन सत्ता पक्ष इन्हें पारित करने पर अड़ी रही और उन्हें जल्दबाजी में पारित कर दिया। इनके विरोध में पूरे भारत में विरोध हुए, लेकिन सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं हुई और अब तब पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव नजदीक है तब जाकर सरकार ने इन्हें निरस्त करने का फैसला लिया है, जो साफ तौर पर दर्शाता है कि सरकार की मंशा चुनावों में लाभ लेने की है। पवार ने कहा कि सालभर से दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर पर विरोध कर रहे किसानों की परेशानी सरकार को पहले क्यों नहीं दिखी। हालांकि जो हुआ वह अच्छा हुआ, लेकिन किसानों के संघर्ष को नहीं भुलाया जा सकता।












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