Vijay TVK Win: विजय बनेंगे तमिलनाडु के सीएम, लेकिन श्रीलंका को किस बात का डर, क्यों मची खलबली?
Thalapathy Vijay TVK Win: तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अभिनेता विजय (थलपति) की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कड़गम' (TVK) ने 108 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया है। बहुमत के करीब पहुंचने के बाद विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। इस जीत की गूंज पड़ोसी देश श्रीलंका में भी सुनाई दे रही है।
जहां एक तरफ श्रीलंकाई तमिलों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी ओर श्रीलंका सरकार विजय के पुराने कड़े रुख को लेकर चिंता में है। विजय पहले भी कच्चातिवु द्वीप को वापस भारत में मिलाने की वकालत कर चुके हैं, जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

श्रीलंका में 'सुनामी' जैसी जीत की चर्चा
श्रीलंका के तमिल मीडिया में विजय की जीत को 'सुनामी' और एक ऐतिहासिक बदलाव बताया जा रहा है। वहां के प्रमुख अखबारों जैसे वीरकेसरी और तमिलन ने इसे अपनी हेडलाइन बनाया है। श्रीलंकाई कार्टूनिस्टों ने विजय को दक्षिण भारत के एक नए और शक्तिशाली सितारे के रूप में पेश किया है। श्रीलंका में बाकी भारतीय राज्यों के चुनावी नतीजों से ज्यादा तवज्जो विजय की जीत को मिली है, जिससे पता चलता है कि वहां के लोग उन्हें कितनी उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
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Katchatheevu Island Dispute Vijay: कच्चातिवु द्वीप पर पुराना विवाद
कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा विजय और श्रीलंका के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह है। यह 285 एकड़ का द्वीप 1974 में एक समझौते के तहत श्रीलंका को दे दिया गया था। विजय का मानना है कि हमारे मछुआरों की सुरक्षा के लिए इस द्वीप को वापस लेना जरूरी है। उन्होंने अतीत में इस मुद्दे पर कड़ा बयान दिया था, जिससे श्रीलंका सरकार काफी असहज हो गई थी। अब विजय के सत्ता में आने से यह विवाद फिर गरमा सकता है।
Vijay CM of Tamil Nadu: मछुआरों की सुरक्षा का बड़ा सवाल
विजय ने हमेशा तमिलनाडु के मछुआरों पर होने वाले हमलों का विरोध किया है। उन्होंने श्रीलंकाई नौसेना द्वारा मछुआरों पर की गई फायरिंग की कड़ी निंदा की थी। विजय का तर्क है कि अगर कच्चातिवु भारत के पास वापस आ जाता है, तो तमिलनाडु के मछुआरे बिना किसी डर के समंदर में अपना काम कर सकेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय केंद्र सरकार पर इस द्वीप को वापस लेने का दबाव बना सकते हैं, जो श्रीलंका के लिए बड़ी सिरदर्द होगा।
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श्रीलंकाई नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
श्रीलंका के तमिल नेता विजय को एक नायक की तरह देख रहे हैं और उन्हें जीत की बधाई दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि विजय के आने से श्रीलंका के तमिलों के हितों की रक्षा होगी। हालांकि, श्रीलंका की सरकार और वहां के विदेश मंत्री पहले ही विजय के बयानों को 'चुनावी बयानबाजी' करार दे चुके हैं। सरकार को डर है कि विजय अपनी राजनीति चमकाने के लिए कच्चातिवु के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना सकते हैं।
भविष्य के रिश्तों में आ सकती है खटास
तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के तौर पर विजय का रुख श्रीलंका के साथ भारत के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। अगर विजय अपनी मांग पर अड़े रहे, तो भारत और श्रीलंका के बीच सालों से चले आ रहे समुद्री समझौतों पर सवाल उठ सकते हैं। श्रीलंका को डर है कि एक लोकप्रिय नेता होने के नाते विजय जनता की भावनाओं को भड़का सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी और अधिक बढ़ने की आशंका है।












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