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जनसुनवाई में SDM अरविंद माहौर की धमकी, जाते हो या थप्पड़ मारूं- VIDEO वायरल, अफसरशाही की मानसिकता उजागर

MP Morena News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ में एक जनसुनवाई के दौरान उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) अरविंद माहौर द्वारा एक फरियादी को खुलेआम धमकी देने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

इस वीडियो में SDM माहौर को समाजसेवी धर्मेंद्र चतुर्वेदी उर्फ 'चंबल के अन्ना हजारे' को धमकाते हुए कहते सुना जा सकता है, "जाते हो या थप्पड़ मारूं?" यह घटना मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को सबलगढ़ SDM कार्यालय में हुई, जब चतुर्वेदी EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र से संबंधित समस्या को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे।

MP Morena SDM Arvind Mahor threatens to slap you during public hearing video goes viral

इस घटना ने न केवल मध्य प्रदेश की अफसरशाही की सामंती मानसिकता को उजागर किया है, बल्कि जनसुनवाई जैसे लोकतांत्रिक मंच की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सहित कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है, और मांग की है कि SDM के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला

मंगलवार को सबलगढ़ SDM कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान समाजसेवी धर्मेंद्र चतुर्वेदी, जिन्हें 'चंबल के अन्ना हजारे' के नाम से जाना जाता है, EWS प्रमाणपत्र से संबंधित एक शिकायत लेकर पहुंचे। चतुर्वेदी ने प्रशासनिक लापरवाही और देरी पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में SDM अरविंद माहौर भड़क गए। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बहस के दौरान माहौर ने चतुर्वेदी को धमकाते हुए कहा, "आप लोकसेवक हैं, आपकी भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए," जिसके जवाब में SDM ने गुस्से में कहा, "जाते हो या थप्पड़ मारूं?" माहौर ने कथित तौर पर अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया और चतुर्वेदी को कार्यालय से बाहर निकलने का आदेश दिया।

इस घटना के बाद धर्मेंद्र चतुर्वेदी ने SDM कार्यालय के बाहर चटाई बिछाकर धरना शुरू कर दिया और 'सीताराम की राम धुन' का भजन शुरू किया। उनके इस विरोध ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, और कार्यालय के बाहर भीड़ जमा हो गई। इस घटना ने मुरैना जिले में प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

धर्मेंद्र चतुर्वेदी: 'चंबल के अन्ना हजारे'

धर्मेंद्र चतुर्वेदी, जिन्हें 'चंबल के अन्ना हजारे' के नाम से जाना जाता है, मुरैना जिले में सामाजिक कार्यों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे एक ITI कर्मचारी हैं और लंबे समय से सामाजिक मुद्दों, जैसे गरीबों के लिए प्रमाणपत्रों की सुविधा, भ्रष्टाचार, और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस घटना से पहले भी चतुर्वेदी कई बार प्रशासन के साथ टकराव की स्थिति में रहे हैं, और उनकी सक्रियता ने उन्हें स्थानीय लोगों के बीच एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया है। उनके धरने और 'राम धुन' के जरिए विरोध ने इस घटना को और अधिक सुर्खियों में ला दिया।

अब तक कोई कार्रवाई नहीं

घटना के बाद मुरैना जिला प्रशासन और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की खबर नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार, मुरैना कलेक्टर को इस घटना की जानकारी दी गई है, और वीडियो की जांच के लिए एक समिति गठित की जा सकती है। हालांकि, SDM अरविंद माहौर के खिलाफ कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके कारण स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।

सबलगढ़ में पहले भी विवादों में रहे SDM

यह पहली बार नहीं है जब सबलगढ़ SDM कार्यालय विवादों में घिरा है। नवंबर 2024 में, तत्कालीन SDM वीरेंद्र कटारे भी एक वायरल वीडियो के कारण सुर्खियों में आए थे, जिसमें वे एक जिला पंचायत सदस्य के साथ धक्का-मुक्की करते दिखे थे। यह मामला खाद वितरण केंद्र से संबंधित था, और कटारे की 'दबंगई' ने स्थानीय स्तर पर हंगामा मचा दिया था। इस बार SDM अरविंद माहौर की धमकी ने एक बार फिर सबलगढ़ SDM कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

सियासी और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत को भी गर्मा दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी और अफसरशाही की बेलगाम मानसिकता का प्रतीक बताया है। NSUI मध्य प्रदेश के अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा, "यह घटना दर्शाती है कि भाजपा शासन में अधिकारी जनता के सेवक नहीं, बल्कि सामंती शासक बन गए हैं। सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।"

वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता केके मिश्रा ने इसे "ट्रांसफर इंडस्ट्री" का हिस्सा बताते हुए कहा, "अधिकारी बिना किसी जवाबदेही के जनता को धमकाते हैं, क्योंकि सरकार उनकी रक्षा करती है।" दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

क्या है जनसुनवाई का उद्देश्य

जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। मध्य प्रदेश में हर मंगलवार को जिला और तहसील स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है, जहां कलेक्टर, SDM, और अन्य अधिकारी जनता की शिकायतें सुनते हैं। हालांकि, सबलगढ़ की इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि क्या जनसुनवाई अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है? क्या अधिकारियों के लिए जनता की बात सुनना अब गवारा नहीं रहा?

मांगें और संभावित कार्रवाई

धर्मेंद्र चतुर्वेदी और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि SDM अरविंद माहौर के खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई की जाए:

  • तत्काल निलंबन: SDM माहौर को उनके पद से तत्काल निलंबित किया जाए।
  • जांच समिति का गठन: घटना की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
  • जनसुनवाई में सुधार: जनसुनवाई प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
  • अधिकारियों का प्रशिक्षण: अधिकारियों को जनता के साथ व्यवहार में संवेदनशीलता और मर्यादा का प्रशिक्षण दिया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि मध्य प्रदेश के सभी SDM और कलेक्टर कार्यालयों में CCTV कैमरे लगाए जाएं ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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