UP News: पाकिस्तान के वीडियो को मुरादाबाद की घटना बताकर वायरल, एक छात्र समेत सात गिरफ्तार
UP News: मुरादाबाद सोशल मीडिया के जरिए नफरत फैलाने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर एक विदेशी हत्या के वीडियो को झूठा बताकर सांप्रदायिक रंग देने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि वीडियो पाकिस्तान का था, लेकिन उसे मुरादाबाद के मंसूरपुर गांव की घटना बताकर वायरल किया गया। इसका मकसद था दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करना और माहौल बिगाड़ना।

पुलिस के अनुसार, यह वीडियो कई WhatsApp ग्रुपों में शेयर किया गया। उसमें बजरंग दल का नाम जोड़ा गया और साथ में भड़काऊ संदेश भी भेजे गए, जिससे अफवाहों को तेजी से फैलाया जा सके।
खासतौर पर तैयार किया गया ग्रुप
जांच में पता चला कि "उम्मति मुजफ्फरनगर" नामक नया WhatsApp ग्रुप इसी मकसद से तैयार किया गया था। यह ग्रुप बीए द्वितीय वर्ष के छात्र शालिक ने बनाया, जिसमें 400 से अधिक सदस्य जोड़े गए थे।
शालिक मिमलाना रोड का निवासी है। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पाया कि ग्रुप के जरिए योजनाबद्ध ढंग से वीडियो को वायरल किया गया। इसमें उकसाने वाले ऑडियो क्लिप भी शामिल थीं।
गिरफ्तार हुए युवक, दो सगे भाई भी शामिल
पुलिस ने इस मामले में जिन सात लोगों को पकड़ा है, उनमें दो सगे भाई भी शामिल हैं, जिनकी मुरादाबाद में कपड़े की दुकान है। इनके अलावा मंसूरपुर का एक किसान जमीरूद्दीन भी इस साजिश का हिस्सा था।
पहली गिरफ्तारी 21 जुलाई को मुजफ्फरनगर के ककरौली क्षेत्र से हुई थी। वहीं से साजिश की परतें खुलनी शुरू हुईं और बाद में छह अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया। जांच अब भी जारी है।
वीडियो के पीछे था उकसावे का एजेंडा
पुलिस ने पुष्टि की है कि वायरल वीडियो में पाकिस्तान की एक हत्या दिखाई गई थी। लेकिन इसे मुरादाबाद का बताकर प्रचारित किया गया और यह दावा किया गया कि यह घटना एक हिंदू संगठन की ओर से की गई है।
इस वीडियो के साथ "किसी को नहीं छोड़ा जाएगा" जैसे उत्तेजक संदेश भेजे गए। इसका उद्देश्य लोगों को भड़काना और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना था। पुलिस ने वक्त रहते स्थिति को संभाल लिया।
इस मामले में पहले जो एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमें अब और भी गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस ने आरोपियों पर यूएपीए, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की धाराएं लगाई हैं।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, जांच के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। अब तक जिन छह WhatsApp ग्रुपों की पहचान हुई है, उनके करीब ढाई हजार सदस्यों की छानबीन की जा रही है।












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