'हम BJP के वरिष्ठ नेताओं से', शरद पवार और अजित पवार की NCP के विलय पर दिग्गज नेता ने दिया बड़ा बयान
Maharashtra Political News: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के नेता अपनी पुरानी पार्टी छोड़ कर बेहतर मौके की तलाश में दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। इतना ही नहीं दो राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रमुख ठाकरे ब्रदर्स लगभग दो दशक बाद पुरानी लड़ाई भुलाकर एक मंच पर साथ नजर आए। MNS प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) के गठबंधन की संभावनाओं के बीच वहीं चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार की साथ आने की अटकलें फिर तेज हो गई।
इन अटकलों के बीच अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का शरद पवार और अजित पवार की NCP के विलय को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिसके बाद चाचा-भतीजा साथ आएंगे या नहीं? इसको लेकर तस्वीर साफ हो चुकी है।

दरअसल, शनिवार को एनसीपी और एनसीपी (SP) के विलय को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सुनील तटकरे ने साफ कर दिया कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच फिलहाल कोई चर्चा नहीं हो रही है और ना ही कोई बातचीत हो रही है।
हम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से...
अजित गुट की एनसीपी के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दावा करते हुए कहा, "अब हमारी पार्टी एनडीए (महायुति गठबंधन) में है और एनडीए के साथ ही रहने का संकल्प ले चुकी है। एनडीए में अजित पवार गुट वाली एनसीपी की भागीदारी स्पष्ठ है। आज कोई भी मुद्दा नहीं है, लेकिन ऐसा कोई मुद्दा (NCP विलय) है, तो हम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से इस पर चर्चा करेंगे और उसके बाद ही निर्णय होगा।"
भाजपा की मंजूरी है जरूरी
यानी सुनील तटकरे ने साफ कर दिया है कि शरद पवार और अजित पवार की NCP के विलय की फिलहाल कोई संभावना नहीं है, अगर भविष्य में अगर दोनों पार्टियों के विलय को लेकर बातचीत होगी तो उसके लिए एनडी का प्रतिनिधित्व कर रही भाजपा की मंजूरी जरूरी होगी।
चाचा- भतीजे के साथ आने की क्यों लग रही अटकलें?
गौरतलब है कि लंबे असरे के बाद कुछ माह पहले महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे की शादी में पूरी पवार फैमिली साथ नजर आई थी। जिसमें एनसीपी के संस्थापक शरद पवार और उनकी बिटिया सुप्रिया सुले भी पहुंची थीं। इसके अलावा कई राजनीतिक कार्यक्रमों में चाचा-भतीजे एक मंच पर साथ नजर आए और कई मौके पर मुलाकातें होती रहीं। जिसके बाद दोनों की पार्टियों के विलय की अटकलें समय-समय पर तेज हुई।
शरद पवार और अजित पवार क्यों हुए थे अलग?
2023 जुलाई में महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शरद पवार को तगड़ा झटका उनके ही सगे भतीजे अजित पवार ने दिया था। अजित पवार ने चाचा से बगावत कर भाजपा के प्रतिनिधित्व वाली महायुति का दामन थाम लिया था। इतना ही नहीं 10 जून 1999 में जिस एनसीपी की शरद पवार ने स्थापना की थी उस वास्तविक एनसीपी पर भी भतीजे अजित पवार ने कब्जा जमा लिया।
चुनाव आयोग ने अजित पवार की पार्टी का ही असली एनसपी की मान्यता दी और उसका चुनाव चिन्ह घड़ी भी अजित पवार गुट को आवंटित कर दी। जिसके बाद मजबूरी में शरद पवार को अपनी गुट वाली पार्टी का नाम एनसीपी ( शरद पवार) करना पड़ा और नया चुनाव चिन्ह आवंटित करवाना पड़ा। जिसके कारण शरद पवार की एनसीपी को तगड़ा झटका लगा।












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