Shiv Sena UBT Rebel: कौन हैं ओमप्रकाश राजे निम्बालकर? शिंदे गुट में हुए शामिल, बगावत से बढ़ी उद्धव की टेंशन
Shiv Sena UBT Rebel MPs: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने रविवार, 21 जून को आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
उनके इस कदम को उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के भीतर पहले से ही बगावत के संकेत मिल रहे थे।

ओमप्रकाश राजे निम्बालकर, शिंदे गुट में शामिल होने वाले दूसरे बागी सांसद बन गए हैं। इससे पहले हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टिकर भी शिंदे खेमे का दामन थाम चुके हैं। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
Who Is MP Omprakash Raje Nimbalkar: कौन हैं ओमप्रकाश राजे निम्बालकर?
ओमप्रकाश राजे निम्बालकर महाराष्ट्र के धाराशिव (उस्मानाबाद) लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वह लंबे समय से शिवसेना की राजनीति से जुड़े रहे हैं और मराठवाड़ा क्षेत्र में उनकी अच्छी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। निम्बालकर स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेता के रूप में पहचान रखते हैं और अपने क्षेत्र में संगठन तथा कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत प्रभाव रखते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर जीत हासिल की थी। ओमप्रकाश कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता पवनराजे निंबालकर के बेटे हैं, जिनकी 2006 में एक राजनीतिक हत्या कर दी गई थी। ओमराजे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
धाराशिव लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए ओमराजे निंबालकर की मराठवाड़ा के युवाओं और किसानों के बीच गहरी पैठ है। शिवसेना में जब 2022 में पहली बड़ी टूट हुई थी, तब ओमराजे निंबालकर मजबूती से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे थे। यही कारण है कि उनका शिंदे गुट में जाना उद्धव ठाकरे के लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
शिंदे गुट में शामिल होने का ऐलान
रविवार, 21 जून को ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने का फैसला कर लिया। उनके इस कदम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।उनके फैसले से पहले नागेश पाटिल आष्टिकर ने भी शिंदे गुट में शामिल होने की पुष्टि की थी। आष्टिकर ने अपने फैसले के पीछे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने और पार्टी नेताओं की टिप्पणियों को वजह बताया था।
कैसे शुरू हुई बगावत?
17 जून को दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में पार्टी के छह सांसद शामिल नहीं हुए। इन सांसदों में ओमप्रकाश राजे निम्बालकर, नागेश पाटिल आष्टिकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल थे। बैठक में न आने के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि ये सांसद जल्द ही शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। शुरुआत में किसी सांसद ने खुलकर अपना रुख नहीं बताया, लेकिन बाद में घटनाक्रम तेजी से बदलने लगा।
उद्धव ठाकरे के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसद हैं। ऐसे में दो सांसदों के खुले तौर पर शिंदे गुट में जाने से पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है। HT की रिपोर्ट के मुताबिक- यदि बाकी बागी सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।
ओमप्रकाश राजे निम्बालकर के शामिल होने से एकनाथ शिंदे की शिवसेना को राजनीतिक मजबूती मिली है। वहीं उद्धव ठाकरे के सामने अपने सांसदों और संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और बड़ी हो गई है।
फिलहाल इतना तय है कि ओमप्रकाश राजे निम्बालकर के शिंदे गुट में जाने से उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है और पार्टी के भीतर चल रही बगावत अब खुलकर सामने आ चुकी है।














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