Shiv Sena UBT के 6 बागी सांसदों को क्या है खतरा? बढ़ाई गई Y+ सिक्योरिटी, पुलिस और खूफिया एजेंसियां अलर्ट
Shiv Sena UBT Rebel 6 MP Get Y+ Security: महाराष्ट्र में शिवसेना (UTB) से बगावत करने वाले 6 सांसदों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उद्धव की सेना से एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले इन सांसदों को 'Y' श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा देने की मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शिवसेना (यूबीटी) गुट के बागी सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद तत्काल प्रभाव से 'Y' श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा दी है। इसके साथ ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां को भी सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

बागी सांसदों की क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?
महाराष्ट्र में इन छह सांसदाें की बगावत से आए राजनीतिक भूचाल के बाद केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है। सुरक्षा पर चिंता जाहिर की थी, जिसके बाद दिल्ली से इस फैसले को हरी झंडी दे दी है।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों में संकेत मिले थे कि राज्य की राजनीति में हुए बदलाव के चलते इन बागी नेताओं पर हमला होने या उनके निजी आवासों को निशाना बनाए जाने की बड़ी आशंका है। राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाकों में दौरों के दौरान इन सांसदों को किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाने के लिए पुख्ता पहरे की जरूरत थी। इसी के तहत गृह मंत्रालय ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट भी जारी किया है।

टूट के बाद आक्रामक हुए उद्धव की शिवसेना
बता दें महाराष्ट्र में राजनीतिक निष्ठा बदलने के बाद उद्धव की शिवसेना सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रही है। टूट के बाद उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता लगातार बागी सांसदों पर निशाना साध रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहे हैं। शिवसेना (UBT) ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
वनइंडिया मराठी के संपादक प्रितेश सूर्यवंशी के अनुसार "बाला साहेब की शिवसेना के 'सैनिक' और उनका 'आक्रोश' हमेशा से सबसे प्रभावशाली हथियार रहा है। अब जबकि पार्टी में सांसदों की टूट के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी का आस्तित्व खतरे में पड़ गया है, तो उद्धव के वफादार शिवसैनिक आक्रामक हो सकते हैं। शिवसेना में पहले बगावती नेताओं पर जानलेवा प्रहार तक हो चुके हैं। इसलिए इन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने के अलावा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर है।"
प्रितेश सूर्यवंशी के अनुसार, इस टूट के बाद यूबीटी द्वारा बार-बार 'शिवसैनिकों के गुस्से' की बात कर संजय राउत का धमकाना दरअसल एक पूर्वनियोजित रणनीतिक कदम है। इसके जरिए पार्टी अपने जमीनी कैडर को एकजुट रखना चाहती है और साथ ही विपक्षी सांसदों पर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहती है ताकि वे असहज महसूस करें।
कौन हैं ये बागी सांसद, जिन्हें मिली Y+ सिक्योरिटी
संजय जाधव परभणी से सांसद हैं और इनका मराठवाड़ा में मजबूत जनाधार है।संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम से सांसद हैं। बाबासाहेब (भाऊसाहेब) वाकचौरे (शिरडी) से सासंद हैं। पहले कांग्रेस और भाजपा में रहे, बाद में उद्धव गुट में लौटे और एक बार फिर पाला बदलते हुए शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। नागेश पाटिल अष्टिकर हिंगोली से सांसद हैं और मराठवाड़ा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ओमराजे निंबालकर धाराशिव से सांसद हैं और मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्रीय नेता हैं। इनके अलावा संजय दीना पाटिल बगावत कर शिंदे गुट में शामिल हो गई हैं। टूट गई Uddhav Thackeray की शिवसेना, 6 बागी सांसद Eknath Shinde गुट में हुए शामिल, क्या होगा असर?
क्या होती है 'Y' श्रेणी की सुरक्षा और इसके नियम?
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही सुरक्षा ग्रेड बदलने का फैसला किया जाता है। भारत में विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए कई श्रेणियां निर्धारित हैं, जिनमें 'Y' श्रेणी काफी महत्वपूर्ण है। इस सुरक्षा चक्र के तहत संबंधित व्यक्ति को कुल 11 सुरक्षाकर्मी प्रदान किए जाते हैं। इनमें कम से कम दो पर्सनल सिक्योरिटी अधिकारी (पीएसओ) और शेष पुलिस बल के जवान शामिल होते हैं। यह विशेष सुरक्षा केवल उन्हीं लोगों को मिलती है जिनकी जान को वास्तविक खतरा होने की पुष्टि होती है।
- सुरक्षा श्रेणी सुरक्षाकर्मियों की संख्या कमांडो की मौजूदगी
- X श्रेणी 2 सुरक्षाकर्मी कोई कमांडो नहीं, पुलिस बल
- Y श्रेणी 11 सुरक्षाकर्मी 1 या 2 पीएसओ/कमांडो
- Y+ श्रेणी 11 सुरक्षाकर्मी 2 से 4 कमांडो
- Z श्रेणी 22 सुरक्षाकर्मी 4 से 5 कमांडो
- Z+ श्रेणी 55 सुरक्षाकर्मी 10 से अधिक विशेष कमांडो













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