महाराष्ट्र में अब MVA के बीच छिड़ी जंग, कांग्रेस ने NCP के अजित पवार पर लगाए गंभीर आरोप
मुंबई, 23 जून: महाराष्ट्र की सत्ताधारी शिवसेना पहली बार ऐतिहासिक टूट की ओर बढ़ रही है। इस बीच सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के दो और सहयोगियों कांग्रेस और एनसीपी के बीच भी संग्राम छिड़ गया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार पर अपनी पार्टी के एमएलए और मंत्रियों को फंड के लिए प्रताड़ित करने के आरोप लगा दिए हैं। पटोले ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पवार उनकी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों का डेवलपमेंट फंड रोक रहे हैं। गौरतलब है कि पटोले का यह बयान शिवसेना के नेताओं की ओर से एनसीपी पर यही आरोप लगाए जाने के बाद आए हैं। शिवसेना विधायकों का आरोप है कि एनसीपी उनके विधायकों का फंड नहीं देती, लेकिन फिर भी नेतृत्व उससे कुछ नहीं कह पाता। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना सरकार में कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल हैं।

कांग्रेस ने अजित पवार पर लगाए प्रताड़ना के आरोप
महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया है, 'अजित पवार ने कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों को भी प्रताड़ित किया है। हमने इन हथकंडों का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार लोगों के कल्याण के लिए है। इन हथकंडों का हमारा विरोध राजनीतिक नहीं है।' गौरतलब है कि अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वित्त मंत्री भी हैं।
कांग्रेस के आरोपों पर एनसीपी संभल कर बोल रही है
जब पटोले के आरोपों के बारे में एनसीपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल से पूछा गया तो उन्होंने इसे ज्यादा महत्त्व नहीं देते हुए कहा कि 'यहां तक कि पार्टी के अंदर भी नेता लोग एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करते हैं। इसलिए ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे कि गंभीरता से लिया जा सकता है।' गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों के पार्टी नेतृत्व से बगावत की वजह से उद्धव सरकार के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे की अगुवाई में मुंबई से सूरत और फिर वहां से गुवाहाटी जाकर डेरा डाले हुए हैं। जहां उनके समर्थक विधायकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और उद्धव ठाकरे के हाथ से विधायक फिसलते जा रहे हैं।
शिवसेना के बागी विधायक भी उठा रहे हैं यही मुद्दा
शिवसेना के बागी एमएलए संजय शिरसत ने मुख्यमंत्री ठाकरे की लिखी चिट्ठी में दावा किया है कि एकनाथ शिंदे ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि पार्टी के एमएलए पिछले ढाई साल से 'अपमानित' हो रहे हैं, जिसके बाद वे ऐसा करने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि शिंदे ने अपनी पार्टी के एमएलए लोगों से उनकी शिकायतें सुनी हैं, उनके क्षेत्रों में विकास से जुड़े मुद्दों और उससे जुड़े फंड पर बात की है और साथ ही कांग्रेस और एनसीपी से उनकी समस्याओं पर भी गौर किया है।












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