क्या खतरे में हैं सुनेत्रा पवार की डिप्टी सीएम की कुर्सी? आखिर क्यों उठ रहा ये सवाल
Maharashtra Deputy CM Sunetra Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद एक ओर शोक का माहौल था, तो दूसरी ओर सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर सियासी और संवैधानिक बहस तेज हो गई। दावा किया जा रहा है कि पति के निधन के तीन दिन बाद उपमुख्यंत्री पद की शपथ लेने वाली उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार की डिप्टी सीएम की कुर्सी खतरे में हैं। जानिए क्या है पूरा मामला...
हालांकि इस पूरे विवाद पर एनसीपी अध्यक्ष सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम पद पर सवाल उठाने वालों को दो टूक जवाब दिया है साथ ही एनसीपी के विलय की चर्चाओं और उस समय दिए गए बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

सुनीत तटकरे ने दिया जवाब
एबीपी माझा को दिए विशेष इंटरव्यू में सुनील तटकरे ने कहा कि लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते उन्हें संवैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं की पूरी समझ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति विधायक या सांसद न होने की स्थिति में भी कितने समय तक मंत्री पद पर रह सकता है, इसकी मिसालें पहले भी मौजूद हैं।
तटकरे ने कहा, "1991 में अजित पवार का उदाहरण है, शरद पवार का भी उदाहरण है। कौन शपथ ले सकता है और किन परिस्थितियों में ले सकता है, यह हमें भली-भांति मालूम है।"
सुनेत्रा पवार की डिप्टी सीएम की कुर्सी खतरे में, क्यों उठा ये सवाल?
इस विवाद की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया के एक दावे से हुई थी। उन्होंने कहा था कि सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद जब तक राष्ट्रपति उस इस्तीफे को स्वीकार नहीं करते, तब तक कोई दूसरा संवैधानिक या गैर-संवैधानिक पद नहीं लिया जा सकता।
उनका यह भी कहना था कि उपमुख्यमंत्री पद कोई संवैधानिक पद नहीं है, इसलिए सुनेत्रा पवार को पहले राज्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेनी चाहिए थी। इसी आधार पर सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम पद के खतरे में होने का दावा किया गया।
तात्कालिक नहीं, 72 घंटे बाद हुई शपथविधि
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील तटकरे ने साफ किया कि सुनेत्रा पवार ने तुरंत उपमुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ली थी। उन्होंने कहा, "अजित पवार के निधन के बाद सरकारी शोक घोषित था। हमने 72 घंटे बाद शपथविधि करवाई। यह तात्कालिक निर्णय नहीं था। शोक समाप्त होने के बाद ही सुनेत्रा पवार ने शपथ ली।"
विलय की चर्चा अंतिम संस्कार से पहले क्यों?
एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी तटकरे ने सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि जब अजित पवार का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, उसी समय विलय की चर्चा किसने और क्यों शुरू की, यह बड़ा सवाल है। तटकरे ने पूछा, "अंतिम संस्कार से पहले ही इंटरव्यू देकर विलय की बात करने का उद्देश्य क्या था?"
भाजपा के साथ स्थिर सरकार की इच्छा पहले से थी
सुनील तटकरे ने यह भी कहा कि भाजपा के साथ स्थिर और विकासोन्मुख सरकार बनाने की इच्छा अजित पवार ने 2019 में ही जताई थी। उनके अनुसार, मौजूदा राजनीतिक दिशा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है।
प्रफुल पटेल और मैं आलोचना के शिकार बने
विलय की चर्चाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में तटकरे ने कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसमें प्रफुल्ल पटेल और वे खुद आलोचना के केंद्र में आ गए।
उन्होंने कहा, "आज सभी लोग विलय की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या वास्तव में विलय होने वाला था, इस पर मैं ज्यादा नहीं बोलना चाहता।"
सुनेत्रा पवार का फैसला पार्टी के लिए अहम
सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में उन्होंने खुद को संभालते हुए पार्टी को मजबूती देने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि दादा (अजित पवार) द्वारा आगे बढ़ाए गए विचारों को आगे ले जाने के लिए सुनेत्रा पवार का यह कदम एनसीपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विलय और उसके पीछे के उद्देश्यों पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साधे रखने की बात कही।
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