Sunetra Pawar चुनी गईं एनसीपी विधायक दल की नेता, शपथ ग्रहण में शामिल होंगे सुप्रिया सुले और शरद पवार?
Sunetra Pawar News: महाराष्ट्र की राजनीति में फिर एक बार बड़े बदलवाव होने जा रहे हैं। दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य का नया उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। एनसीपी विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें नेता चुन लिया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, सुनेत्रा पवार शनिवार शाम 5 बजे पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी। इस फैसले के बाद मुंबई से लेकर बारामती तक सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
इसी बीच पारिवारिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी हलचल देखने को मिल रही है। सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने शरद पवार से मुलाकात की है, जिसे राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस मुलाकात ने एनसीपी के भविष्य और दोनों गुटों के संभावित एकीकरण की अटकलों को और हवा दे दी है।

Sunetra Pawar के शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे शरद पवार
- राजभवन से शपथ ग्रहण को लेकर आधिकारिक कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल आचार्य देवव्रत 5 बजे सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे।
- लोक भवन में समारोह की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। शपथ ग्रहण में एनसीपी के चुनिंदा नेता ही शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि सीएम देवेंद्र फडणवीस इसका हिस्सा बन सकते हैं।
- शरद पवार और सुप्रिया सुले इस शपथ ग्रहण का हिस्सा नहीं होंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अजित पवार के चाचा ने कहा कि उन्हें इस पूरे कार्यक्रम और फैसलों की जानकारी नहीं है।
NCP के विलय की भी चल रही अटकलें
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी संकेत दिया है कि एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय लगभग तय था और यह खुद अजित पवार की भी इच्छा थी। उन्होंने कहा कि अजित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल के बीच इस मुद्दे पर पहले ही बातचीत शुरू हो चुकी थी और इसे आगे बढ़ाना जरूरी है।
विधायक दल की बैठक में औपचारिक ऐलान
विधायक दल की बैठक के बाद सुनेत्रा पवार के नाम की औपचारिक घोषणा कर दी गई। वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। फिलहाल सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद ही संवैधानिक प्रक्रिया के तहत वे नई जिम्मेदारी संभाल सकेंगी। आने वाले कुछ महीने प्रदेश की राजनीति और एनसीपी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।












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