शिवसेना तो बीजेपी क्यों नहीं? शरद पवार ने एनसीपी के 'बागियों' के तीखे सवालों का दिया करारा जवाब

एनसीपी के दिग्गज शरद पवार ने पार्टी के बागी कैंप की ओर से उठाए गए मुद्दों पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने भतीजे अजित पवार कैंप को उनके प्रश्नों का उत्तर देने के साथ-साथ चेतवानी भी दी है और कहा है कि उन्हें कोई भी कदम उठाने से पहले एक बार उनसे बात करनी चाहिए थी।

शरद पवार ने अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल कैंप के लोगों से कहा है कि 'जो लोग बीजेपी के साथ गए....उनका इतिहास देखो। अकाली दल ने पंजाब में सरकार बनाई थी। वह अब सरकार में नहीं हैं।'

sharad pawar to rebels

जिसके साथ सरकार बनाती है बीजेपी उसे बर्बाद कर देती है-शरद पवार
चाचा बोले, 'तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में भी यही हुआ था। नीतीश कुमार को बिहार में एक फैसला लेना पड़ा....बीजेपी उस पार्टी को बर्बाद कर देती है, जो उसके साथ सरकार बनाती है।' दरअसल, अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल की दलील है कि अगर एनसीपी शिवसेना के साथ गठबंधन कर सकती है तो बीजेपी के साथ क्यों नहीं। इसी पर शरद पवार ने अपने मुताबिक दोनों का अंतर समझाने की कोशिश की है।

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शिवसेना का हिंदुत्व सबको साथ लेकर चलने का है- शरद पवार
शरद पवार ने कहा, 'हां, शिवसेना भी हिंदुत्व पर चलती है। वह सबको साथ लेकर चलते हैं, यही उनका हिंदुत्व है। बीजेपी का हिंदुत्व लोगों को बांटना, जहरीला, मनुवादी और खतरनाक है....जो लोग धर्म और जाति के आधार पर लोगों को बांटते हैं, वह वे नहीं हो सकते जिन्हें देश से प्यार हो। इसलिए हम उनके साथ नहीं जा सकते, जो इसमें विश्वास रखते हैं।'

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नगालैंड में भाजपा को समर्थन देने पर भी दी सफाई
उन्होंने नगालैंड में बीजेपी गठबंधन सरकार को एनसीपी के समर्थन के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। बागियों का यह भी बड़ा सवाल रहा है। उन्होंने कहा, 'नगालैंड में हमारे सात विधायक बीजेपी के साथ हैं। नगालैंड दूसरे देश से लगी सीमा वाला सीमावर्ती राज्य है। जिस राज्य में सीमा चीन और पाकिस्तान से मिलती है, उसको लेकर हमें बहुत सोचना पड़ता है। दूसरा देश कोई फायदा उठा सकता है, इसलिए हमने बाहर से समर्थन दिया है। यहां उन्होंने सरकार बना ली और यह उदाहरण दिया, मैं इस उदाहरण से सहमत नहीं हो सकता।'

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एमएलए जुटाने में चाचा पर सवा शेर साबित हुए अजित पवार
हालांकि, एनसीपी के बुजुर्ग नेता की ओर यह कहकर कि '83 साल का आदमी अकेले लड़ रहा है' व्हिप जारी किया गया, फिर भी 13 एमएलए ही उनके समर्थन में जुट पाए। इसी के बाद अजित पवार ने उनकी 83 साल की उम्र को लेकर निशाना साधा था कि आखिर कहीं तो रुकेंगे! हालांकि, अजित पवार भी 53 विधायकों की पार्टी को तोड़ने के लिए आवश्यक 36 विधायक नहीं जुटा पाए और कुछ रिपोर्ट के मुताबिक उनकी बैठक में 31 एमएलए जुटे थे। हालांकि, उनका दावा है कि उनके साथ 40 एमएलए का समर्थन है।

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वैसे न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक बाद में अजित पवार गुट ने चुनाव आयोग में हलफनामा देकर दावा किया है कि शरद पवार अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है और 30 जून को ही पार्टी उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजूर कर चुकी है। वैसे शरद पवार ने अपने साथ एमएलए की कम संख्या पर कहा, 'आज की चर्चा है कि हमारे साथ कितने एमएलए हैं। मैं इसपर ध्यान नहीं देता। पहले मेरे पास 68 एमएलए थे, जब मैं कुछ समय के लिए बाहर गया तो 62 हमें छोड़ गए। मेरे पास सिर्फ 6 थे......चुनाव में 62 में से सिर्फ 4 ही वापस लौट पाए। हम नए चेहरों के साथ जीत गए।'

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मैंने अनेकों निशान पर चुनाव लड़ा है-शरद पवार
उन्होंने मंजे हुए राजनेता की तरह समर्थकों से कहा, 'अगर कोई कहता है कि वह हमारा निशान ले लेंगे.....मैं आपको बता दूं कि पार्टी का चिन्ह हमारे साथ रहेगा, यह कहीं नहीं जाएगा। अगर पार्टी की विचारधारा कार्यकर्ताओं के साथ है, तो हमें चिंता करने की जरूरत नहीं है........मैंने अनेकों निशान पर चुनाव लड़ा है।'

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