शिवसेना ने कांग्रेस को बताया बीमार, कहा- BJP संग गुप्त समझौते में पुराने कांग्रेसी, चाहिए फुल टाइम चीफ
मुंबई, 1 अक्टूबर। पंजाब में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस के अंदर पार्टी में अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग उठने के बाद अब उसकी सहयोगी शिवसेना ने भी स्थायी अध्यक्ष नियुक्त करने की आवश्यकता बताई है। शिवसेना ने यह भी कहा पंजाब में संकट के लिए जितना कांग्रेस में नेतृत्व न होना जिम्मेदार है उतना ही भाजपा। सामना में लिखे लेख में शिवसेना ने यह भी आरोप लगाया है कि हालांकि राहुल गांधी कांग्रेस में आ रहे मुद्दों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पार्टी के पुराने नेता पार्टी को डुबोने के इरादे से बीजेपी के साथ गठजोड़ बनाकर उन्हें रोक रहे हैं।

कांग्रेस को बताया बीमार
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है "कांग्रेस को एक पूर्णकालिक अध्यक्ष की आवश्यकता है। बिना सिर के शरीर की क्या उपयोगिता है? कांग्रेस बीमार है और इसका इलाज किया जा रहा है लेकिन क्या यह इलाज सही है या नहीं इसकी समीक्षा की जरूरत है।"
कांग्रेस में जी-23 समूह वाले नेताओं में शामिल कपिल सिब्बल ने दो दिन पहले ही खुलकर पार्टी में स्थायी अध्यक्ष न होने को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया था। रिपोर्ट के मुताबिक इसी समूह के एक अन्य नेता ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाए जाने को लेकर केंद्रीय नेतृत्व को चिठ्ठी भी लिखी थी। वहीं पंजाब सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद नेतृत्व पर हमलावर अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री से बात करनी शुरू कर दी थी। शिवसेना ने अपने लेख में इन नेताओं पर कांग्रेस को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

पुराने कांग्रेसी दिग्गजों पर बीजेपी के साथ मिलने का आरोप
लेख में आगे कहा गया है "राहुल गांधी इस पुरानी हवेली (कांग्रेस) में आई दरार को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कुछ पुराने सामंत नए लोगों को काम नहीं करने दे रहे हैं। अब इनमें से कुछ ने हवेली की बहुत सारी चीजों पर अपना दावा ठोकना शुरू कर दिया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के पुराने नेता बीजेपी के साथ गुप्त समझौते में हैं और वे कांग्रेस को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अगर वहां कोई कमांडर नहीं होगा तो पार्टी कैसे लड़ाई लड़ेगी। कुछ बुद्धिमान कांग्रेस दिग्गजों की ये मांग गलत नहीं है।"
इसमें कहा गया है कि कांग्रेस में नेतृत्व पर संदेह और भ्रम को दूर करने की जरूरत है। राहुल गांधी ने एक दलित नेता को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाकर एक कड़ा कदम उठाया है, लेकिन उनके ही दुलारे नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

सिद्धू पर इतना भरोसा दिखाने की जरूरत नहीं थी- सेना
शिवसेना ने कहा कि चूंकि कांग्रेस में पहले से ही मुंह बंद रखने वाले नेताओं की कमी नहीं थी। ऐसे में राहुल गांधी को हाल ही में पार्टी में शामिल होने वाले सिद्धू पर इतना भरोसा दिखाने की जरूरत नहीं थी। सिद्धू को प्रत्याशित बताते हुए शिवसेना ने कहा है कि कांग्रेस ने इस नेता को अनुचित महत्व देकर अपनी ही परेशानी बढ़ा दी है।
वहीं शिवसेना ने हाल में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फलेरियो की भी आलोचना की है। सेना ने कहा कि इन मोटी चमड़ी वाले नेताओं को शीर्ष पद दिए गए थे। कांग्रेस ने इन्हें राज्ये में मुख्यमंत्री बनाया था लेकिन अब वे पार्टी छोड़ रहे हैं। इसी तरह जितिन प्रसाद को केंद्र में मंत्री बनाया गया था लेकिन वह भी भाजपा में शामिल हो गए और राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री बने हैं।












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