Khanderi fort: अरब सागर के द्वीप पर स्थित इस ऐतिहासिक किले को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने किया बड़ा ऐलान
Khanderi Fort: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने महाराष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर को लेकर बड़ी घोषणा की है। सरकार ने अलाीबाग तालुका के पास अरब सागर के एक द्वीप पर स्थित खंडेरी किले को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है।
संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने के बाद पुरातत्व विभाग को वर्षों से उपेक्षित इस समुद्री किले के संरक्षण का अधिकार मिल गया है। जिसके बाद ना केवल इस किले की पुर्नउद्धार होगा और अच्छे से देखभाल होगी बल्कि पर्यटकों की आमद बढ़ेगी।

अलीबाग तालुका के पास अरब सागर में एक द्वीप पर स्थित खंडेरी किले को राज्य सरकार ने संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने 19 जून को एक अधिसूचना जारी की।
पुरातत्व विभाग खंडेरी किला करेगा संरक्षण
महाराष्ट्र की शिंदे सरकार के इस फैसले से खांदेरी किले के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक महत्व भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहेगा। राज्य पुरातत्व विभाग अब इसके संरक्षण प्रयासों की देखरेख करेगा।
खांदेरी किले का महत्व
खांदेरी किले के समुद्री सुरक्षा महत्व को समझते हुए, छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1672 में इस निर्जन द्वीप को मजबूत करना शुरू किया। हालांकि उस समय विरोध के कारण उन्हें काम को आंशिक रूप से रोकना पड़ा। बाद में 1679-80 के बीच, उन्होंने अंग्रेजों, पुर्तगालियों, मुगलों और सिद्धियों के प्रतिरोध पर काबू पाने के बाद किले का निर्माण पूरा किया।
खांडेरी किले का जानें का क्या है इतिहास
छत्रपति संभाजी महाराज के शासनकाल के दौरान, खंडेरी किला मराठा साम्राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा बन गया। सरखेल कान्होजी राजे आंग्रे ने मराठा सेना का विस्तार किया और कोंकण तट पर अपना प्रभाव बढ़ाया। कोंकण में समुद्री परिवहन पर उनका नियंत्रण सभी समुद्री गतिविधियों के लिए आवश्यक था।
12 नवंबर 1719 को अंग्रेजों और पुर्तगालियों ने संयुक्त हमला किया, लेकिन कान्होजी ने किले की सफलतापूर्वक रक्षा की। मुंबई जाने वाले जहाजों की निगरानी में किले की अहम भूमिका थी। हालांकि, 1818 में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया।
खांदेरी किले की खासियत
खांदेरी किला करीब छह हेक्टेयर में फैला है और इसकी प्राचीरें चौड़ी हैं। इसमें 21 मीनारें और दो द्वार हैं। महावदार द्वार नष्ट हो गया है, जबकि पश्चिम की ओर स्थित चोर दरवाज़ा बरकरार है। किले में चार कुएं और पुरानी इमारतों के अवशेष भी हैं।
कोली समुदाय का है ये तीर्थस्थल
खांदेरी किले में एक लाइटहाउस है, जो कोली समुदाय के लिए एक तीर्थस्थल के रूप में भी कार्य करता है। अपने ऐतिहासिक महत्व के बावजूद, किले को कई वर्षों तक उपेक्षित रखा गया था। अब इसे महाराष्ट्र प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल और खंडहर अधिनियम 1960 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है, इसे बहुत आवश्यक रखरखाव और मरम्मत मिलेगी।












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