Sharad Pawar दोबारा 'पावर' में! संजय राउत ने बताया- गठबंधन की सियासत का पितामह, विपक्षी दलों में भी उत्साह

शरद पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच कथित मनमुटाव की अटकलों पर विराम लग गया। पवार दोबारा एनसीपी चीफ की कुर्सी संभालेंगे। पवार के पावर में लौटने पर संजय राउत ने कहा उनका अध्यक्ष पद पर रहना बेहद अहम है।

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Sharad Pawar ने जैसे ही NCP प्रमुख पद से इस्तीफा देने का फैसला वापस लिया; विपक्षी नेताओं ने इस फैसले को 'धर्मनिरपेक्ष गठबंधन' को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम करार दिया।

उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने कहा, उद्धव ठाकरे और अन्य विपक्षी दलों ने शरद पवार को अपनी भावनाओं से अवगत कराया है कि देश में मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए विपक्षी एकता और देश के लिए उनका नेतृत्व जरूरी है।

शरद पवार के फैसले के पीछे केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और NCP की कथित गुटबाजी से जुड़े सवाल पर राउत ने कहा, ऐसी आशंका है कि शिवसेना को तोड़ने की तर्ज पर ही आने वाले गिनों में NCP का भी वैसा ही हश्र होगा।

राउत ने कहा कि सरकार चाहती है कि एजेंसियों के इस्तेमाल से विरोधी पार्टियों का अस्तित्व समाप्त हो जाए। ये छिपी हुई बात नहीं है। खुद शरद पवार ने इस संबंध में गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखा है जो पब्लिक डोमेन में है।

उन्होंने 2024 के चुनाव में 82 साल के शरद पवार की मौजूदगी को अहम बताते हुए कहा कि पवार गठबंधन की राजनीति में भीष्म पितामह हैं। उनकी गैरमौजूदगी का प्रभाव पड़ेगा।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत के अलावा दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी 'धर्मनिरपेक्ष गठबंधन' को मजबूत करने में पवार की भूमिका पर जोर दिया।

NCP कार्यकर्ताओं के अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी विपक्षी एकता बरकरार रखने में उनकी भूमिका अहम मानते हुए पवार से NCP चीफ की पोस्ट छोड़ने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

कथित मतभेद और मनमुटाव की अटकलों के बीच शरद पवार के भतीजे अजीत पवार प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नहीं थे, लेकिन एनसीपी प्रमुख ने कहा कि इसका कोई अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। सभी एकजुट हैं और इस पर चर्चा कर रहे हैं।

शरद पवार ने एनसीपी में दरार की अटकलों का भी खंडन कर कहा, "अगर कोई जाना चाहता है, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, कोई भी उसे रोकता नहीं है... नेता को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि फ्रंट फुट पर रहकर संगठन को कैसे स्वस्थ बनाया जाए।"

शरद पवार ने कहा कि ऐसे सुझाव थे कि वह पद पर बने रहें और अपनी बेटी और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करें। उन्होंने कहा कि सुझाव को स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें सुप्रिया सुले का भी समर्थन नहीं मिला।

बाद में अजित पवार ने भी पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा वापस लेने के शरद पवार के फैसले का स्वागत कर कहा, राकांपा प्रमुख के फैसले से पार्टी के हर कार्यकर्ता का उत्साह बढ़ेगा।

बता दें कि 1999 में एनसीपी की स्थापना करने वाले शरद पवार पिछले 24 सालों से पार्टी प्रमुख का पद संभाल रहे हैं। 82 वर्षीय पवार 1978 में 38 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने से पहले 27 वर्ष की आयु में पहली बार विधायक बने।

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    महाराष्ट्र में चार बार मुख्यमंत्री रहे पवार रक्षा मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं। शरद पवार ग्रामीण महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं। राजनीतिक हलकों में उन्हें 'चाणक्य' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने महा विकास अघाड़ी (MVA) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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