MP News: किसान कल्याण में मध्यप्रदेश बना मिसाल, पीएम मोदी और सीएम मोहन यादव की योजनाओं से बदली किसानों की तस्वीर
मध्य प्रदेश, पीएम किसान, उच्च गेहूं खरीद, बोनस, विविध फसलें, विस्तारित सिंचाई, सौर पंप और आधुनिक खेती समर्थन के साथ, सीएम मोहन यादव और केंद्रीय योजनाओं के तहत किसान कल्याण को मजबूत कर रहा है, जिससे किसानों की आय और लचीलापन बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के साथ ही किसान कल्याण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता दिखाई दे रहा है। केंद्र की योजनाओं और मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार की किसान केंद्रित नीतियों ने प्रदेश के लाखों किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही किसानों के कल्याण और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी। कृषि प्रधान राज्य मध्यप्रदेश में इन योजनाओं का व्यापक असर देखने को मिला है। राज्य सरकार ने बीमा, सिंचाई, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीक, बाजार सुविधाओं और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस किया है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। मध्यप्रदेश में लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत भी किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में 20,878 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है।
गेहूं खरीदी में रिकॉर्ड उपलब्धि
वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। राज्य सरकार ने इस वर्ष 3,627 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
मोहन यादव सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। समर्थन मूल्य पर निर्बाध खरीदी, स्लॉट अवधि बढ़ाने और सप्ताह में छह दिन उपार्जन जैसे कदमों से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
बोनस और मुआवजा योजनाओं से किसानों को फायदा
राज्य सरकार ने उड़द पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है। सरसों के लिए भावांतर योजना का विस्तार किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। आपदा प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज भी वितरित किए जा रहे हैं।
कृषि कल्याण वर्ष 2026 पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष घोषित किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना और आधुनिक कृषि को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों के हितों को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कई नई योजनाएं लागू की हैं। भावांतर योजना में सरसों को शामिल किया गया है, जबकि उड़द और मूंगफली पर बोनस की घोषणा की गई है।
सिंचाई और आधुनिक खेती पर जोर
प्रदेश सरकार खेती का रकबा बढ़ाने और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रही है। तीन नदी जोड़ो परियोजना के जरिए 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक मंडियां, बीज परीक्षण लैब और तहसील स्तर पर मौसम केंद्र स्थापित करने की योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
किसानों को नि:शुल्क मृदा परीक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद और 24 घंटे बिजली की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सोलर पंप और जैविक खेती को बढ़ावा
कृषक मित्र योजना के तहत किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। इससे किसान बिजली पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रही है। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य बन गया है जहां किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
कृषि विकास दर में तेजी
सरकार की किसान केंद्रित नीतियों का असर प्रदेश की कृषि विकास दर पर भी दिखाई दे रहा है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश की कृषि विकास दर 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
सरकार का मानना है कि किसानों की आय बढ़ाए बिना प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है। इसी लक्ष्य के साथ केंद्र और राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही हैं।












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